ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

आजादी से पहले के किसान आंदोलन कैसे हुए,किस मुद्दे पर हुए ?

दिव्यांश यादव.

किसान अपने आप में एक सत्ताशीष है, वो फसलों का सिर्फ उपज नहीं करता अपितु अपने परिवार की छोटी और बड़ी जरूरतों को भी चलाता है लेकिन कई बार उसे आत्महत्या जैसे घातक परिणाम की तरफ जाना पड़ता है इसकी वजह इतनीं महंगाई में फसलों का उचित दाम नहीं मिल पाना है

इसे हम उस तरह समझ सकते हैं जैसे भुट्टे को किसान 15 रुपये में खरीदता है लेकिन व्यापारी उसे 10 रुपये देकर वही भुट्टा पॉपकॉर्न को बनाकर 30 रुपये में बेचता है और इसी तरह किसान को उसका उचित मूल्य नहीं मिल पाता है जिसके कारण किसान दिन प्रतिदिन कर्ज के तले दबता जाता है

इस उदहारण से आप किसान की दूदर्शा के बारे में समझ सकते है अब इसे किसान आन्दोलन से जोड़कर देखे तो ये साफ पता चलता हैं कि सरकार चाहकर भी किसानों की दुर्दशा को दूर नहीं कर सकती हैं

किसान आंदोलन कोई नई बात नहीं है इसे पहले भी कई किसान आंदोलन हुए है जिन्होंने सत्ताशीषो को झुकने पर मजबूर कर दिया है

1 . वर्ष 1857 के सिपाही विद्रोह विफल होने के बाद विरोध का मोर्चा किसानों ने ही संभाला, क्योंकि अंग्रेजों और देशी रियासतों के सबसे बड़े आंदोलन उनके शोषण से उपजे थे. भारत में जितने भी किसान आंदोलन हुए, उनमें से ज्यादातर अंग्रेजों या फिर देश के हुक्मरानों के खिलाफ हुए और उन आंदोलनों ने शासन की चूलें तक हिला दीं.

2. वर्ष 1918 के दौरान गांधी के नेतृत्व में खेड़ा आंदोलन की शुरुआत की गई. ठीक इसके बाद 1922 में ‘मेड़ता बंधुओं’ (कल्याणजी तथा कुंवरजी) के सहयोग से बारदोली आंदोलन शुरू हुआ. हालांकि, इस सत्याग्रह का नेतृत्व सरदार वल्लभभाई पटेल ने किया. लेकिन, अंग्रेजी हुक्मरानों की चूलें हिलाने वाला सबसे अधिक प्रभावशाली किसानों का आंदोलन नीलहा किसानों का चंपारण सत्याग्रह रहा

3. दक्षिण भारत के दक्कन से फैली यह आग महाराष्ट्र के पूना एवं अहमदनगर समेत देश के कई हिस्सों में फैल गई. इसका एकमात्र कारण किसानों पर साहूकारों का शोषण था. वर्ष 1874 के दिसंबर में एक सूदखोर कालूराम ने किसान बाबा साहिब देशमुख के खिलाफ अदालत से घर की नीलामी की डिग्री प्राप्त कर ली. इस पर किसानों ने साहूकारों के विरुद्ध आंदोलन शुरू कर दिया.

4. होमरूल लीग के कार्यकताओं के प्रयास तथा मदन मोहन मालवीय के दिशा-निर्देश में फरवरी 1918 में उत्तर प्रदेश में ‘किसान सभा’ का गठन किया गया.उत्तर प्रदेश के हरदोई, बहराइच एवं सीतापुर जिलों में लगान में वृद्धि एवं उपज के रूप में लगान वसूली को लेकर अवध के किसानों ने ‘एका आंदोलन’ नामक आंदोलन चलाया.

5. केरल के मालाबार क्षेत्र में मोपला किसानों द्वारा 1920 में विद्रोह किया गया. शुरुआत में यह विद्रोह अंग्रेज हुकूमत के खिलाफ था

6. आंध्रप्रदेश में सीताराम राजू के नेतृत्व में औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध यह विद्रोह हुआ, जो सन् 1879 से लेकर सन् 1920-22 तक छिटपुट ढंग से चलता रहा.

7. विभाजित बिहार के झारखंड में भी आजादी के दौरान टाना भगत ने 1914 में आंदोलन की शुरुआत की थी. यह आंदोलन लगान की ऊंची दर तथा चौकीदारी कर के विरुद्ध था. इस आंदोलन के मुखिया जतरा टाना भगत थे,

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