ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

एग्जिट पोल का कब कब खुला पोल ? Why exit polls are not correct ?

दिव्यांश यादव,

एग्जिट पोल की शुरुआत 1980 में भारतीय मीडिया से हुई थी, इसी के बाद से भारतीय मीडिया चुनाव के बाद से सर्वे करने लगा। दूरदर्शन ने 1996 में एग्जिट पोल शुरू किया था। चुनाव में मतदान खत्म होने के बाद जब मतदाता अपना वोट डालकर निकल रहे होते हैं तब उनसे पूछा जाता है कि उन्होंने किसे वोट दिया। इस आधार पर किए गए सर्वेक्षण से जो व्यापक नतीजे निकाले जाते हैं उन्हें ही एग्जिट पोल कहते हैं।

1998 में चुनाव आयोग ने ओपिनियन और एग्जिट पोल पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग के फैसले को रद्द कर दिया। उसके बाद 2009 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले एक बार फिर एग्जिट पोल पर प्रतिबंध की मांग उठी। बाद में कानून में संशोधन किया गया और संशोधित कानून के अनुसार चुनावी प्रक्रिया के दौरान जब तक अंतिम वोट नहीं पड़ जाता, एग्जिट पोल नहीं दिखाए जा सकते,लेकिन कई बार एग्जिट पोल की वजह से चुनावी दल खुद को मुख्यमंत्री मान लेते हैं और जब रिजल्ट आता है तो कभी कभी निराशा मिल जाती है , सबसे पहले 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा को बहुमत की बात कही गई थी।

 

कांग्रेस के दूसरे नंबर पर रहने की संभावना जताई गई थी। वहीं ज्यादातर एग्जिट पोल ने आप की सीटें बेहद कम बताई थीं। इंडिया टुडे-ओआरजी एग्जिट पोल में तो आप को 10 से भी कम सीटें दी गईं थीं। न्यूज 24-चाणक्य ने आप को सबसे अधिक 31 सीटें दी थीं।

जब रिजल्ट आए तो एग्जिट पोल गलत साबित हो गए। आप’को 28 सीटें मिलीं, जबकि कांग्रेस मात्र आठ सीटों पर सिमट कर रह गई। वहीं, भाजपा की सबसे ज्यादा 32 सीटें आईं।

2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में तमाम एग्जिट पोल में आप को बहुमत मिलने की बात कही गई। लेकिन, एक भी एग्जिट पोल में इतनी ज्यादा सीटों का जिक्र नहीं किया गया। एग्जिट पोल में आप को 35-45 सीटें मिलने का अनुमान लगाया गया, वहीं इंडिया न्यूज-एक्सिस के एग्जिट पोल ने सबसे अधिक 53 सीटें दीं।

एग्जिट पोल में भाजपा की सीटों की संख्या दोहरे अंक में रहने की बात कही गई। इंडिया टीवी-सी वोटर के एग्जिट पोल ने भाजपा को सबसे अधिक 33 सीटें दीं। लेकिन जब नतीजे आए तो आप को प्रचंड बहुमत मिला। आप ने 67 सीटों पर जीत दर्ज की वहीं, भाजपा की मात्र तीन सीटें आईं। इसके अलावा कांग्रेस को 2-5 सीट मिलने के एग्जिट पोल भी गलत साबित हुए और पार्टी खाता भी नहीं खोल पाई, इसके बाद कई पार्टियों ने भी एग्जिट पोल को बन्द करने की मांग उठाई,लेकिन साल दर साल ऐसा चलता रहा,और 2019 हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी वही हुआ,हरियाणा विधानसभा चुनाव के नतीजों में भाजपा को सभी एग्जिट पोल के दावों के विपरीत तगड़ा झटका लगा। एग्जिट पोल में बताया गया कि हरियाणा में भाजपा को प्रचंड बहुमत हासिल हो रहा है जो कि गलत साबित हुआ। सरकार बनाने के करीब दिख रही भाजपा को सिर्फ 40 सीटें मिलीं।

वहीं एग्जिट पोल के उलट कांग्रेस ने 31 सीटों पर जीत हासिल की। एग्जिट पोल में कांग्रेस की करारी हार बताई गई थी।

 

लेकिन चुनाव रिजल्ट एक दम विपरीत आए
और बार बार एग्जिट पोल की पोल खुलती दिखी है,और आज हर चैनल का एग्जिट पोल बेकार साबित हुए हैं !!

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