ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

काव्य चुस्की – दास्तान यूपी की…

मैं यूपी हूं जी हां मैं वही यूपी हूं;

जिसको नेता चुनाव के दरमियान सूबे का सबसे बड़ा राज्य कहते हैं;
लेकिन कहने में कोई गुरेज नहीं है कि हमारे यहां के नेता मानसिकता में कितने छोटे हैं।

यूं तो मेरे राज्य के किसी शहर को;
तहजीब की नगरी कहते हैं तो किसी को इत्र की;
पर हमारे यहां के लोग ;
तहजीब के इत्र की खुशबू से अक्षूते है।

वैसे तो गंगा की पावन धार मुझ यूपी से बहती है;
पर शायद किसी को यह नहीं पता कि वह मुझ यूपी में प्रदूषित कितनी है।
विकास के नाम पर वादे तो ऊंचे ऊंचे होते हैं;
पर चुनाव जाने के बाद सड़क के गड्ढे ना भर पाते है।

कहते हैं यूपी को श्रीराम ने बसाया है;
पर इस कोर्ट कचहरी के चक्कर में हमने अभी भी श्री राम को टेंटों में सजाया है।
अर्शों चला मुकदमा कोर्ट में अब फैसला आया है;
मंदिर मस्जिद के नाम पर राजनीति करने वालों की दुकान पर
पढ़ गया अब ताला है।

विकास के नाम पर कई वादे होते ;
कई जुमले कहे जाते हैं पर चुनाव जीतने के बाद;
कुछ नहीं होता है मुझे यूपी में;
जी हां मैं वही हूं।

Kaushlendra Raj Shukla

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