ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

कैसे रखा केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी का नाम,जानकर हैरान हो जायेंगे आप !

अन्ना आंदोलन खत्म होने के बाद यह तय हो गया था कि अब राजनीतिक दल बनाकर आगे बढ़ा जाएगा। इसके लिए माथापच्ची शुरू हो गई। राजनीतिक पार्टी का नाम क्या होगा, अरविंद केजरीवाल, प्रशांत भूषण, योगेंद्र यादव और कुमार विश्वास जैसे कई चेहरे इस उधेड़बुन में लग गए।

योगेंद्र यादव चाहते थे कि पार्टी का नाम कुछ ऐसा हो, जिसमें स्वराज शब्द आ जाए। केजरीवाल और कुमार विश्वास चाहते थे कि दूसरी पार्टियों की तर्ज पर कोई नाम न हो। कुछ ऐसा खोजना होगा, जो आम लोगों को अपील करे। कई दिनों तक गहन विचार विमर्श चलता रहा।

2012 में केजरीवाल ने अपने साथियों से कहा, एक नाम बहुत प्रभावित कर रहा है। क्या इसे फाइनल कर लें। उस नाम को तय करने वाला दूसरा शख्स कुमार विश्वास था। जो नाम सामने आया, वह था ‘आम आदमी पार्टी’।


पार्टी का नाम सोचने के लिए कई आदमी लगे थे। खास बात यह थी कि जो कोई भी पार्टी का नाम सुझाता था, उसे तर्क भी देना पड़ता था कि यह लोगों के दिमाग में ठीक से बैठेगा या नहीं। दूसरी पार्टियों से यह अलग है क्या। मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों और अन्ना आंदोलन से जुड़ी लोगों की भावनाएं क्या इसमें निहित हैं, आदि ऐसे दर्जनभर सवालों का जवाब मांगा जाता था।

केजरीवाल ने योगेंद्र यादव को फोन किया और बोले, कुछ ध्यान में आया है। अभी मिलना है, सुबह तक का इंतजार नहीं होगा। योगेंद्र बोले ठीक है, सभी प्रशांत भूषण के घर पर एकत्रित हुए। रात के दस बज चुके थे, सभी लोग वहां पहुंच गए। बैठक शुरू हो गई और अरविंद ने पार्टी का नाम सभी के सामने रखा।

आम आदमी पार्टी’ यही वो नाम था, जो कुमार विश्वास और अरविंद केजरीवाल के दिमाग की उपज थी। इस पर चर्चा होने लगी। योगेंद्र यादव बताते हैं कि मुझे उस वक्त ये नाम सही नहीं लगा था। मैं चाह रहा था कि कोई ऐसा नाम हो, जिसमें स्वराज शब्द जरूर शामिल हो जाए।

मेरा सवाल था कि क्या जनता, आदमी शब्द का मतलब मर्द तो नहीं निकालेगी। अगर ये हो गया तो महिलाओं के बीच गलत संदेश जाएगा। केजरीवाल और कुमार विश्वास अपनी बात पर अडिग रहे। उन्होंने विस्तार से बताया कि नहीं, आम आदमी पार्टी में हर व्यक्ति शामिल है। वो चाहे पुरुष हो या महिला।

प्रशांत भूषण की राय ली गई तो वे बोले ठीक है। इसके बाद मैंने भी ज्यादा विरोध नहीं किया। 2013 के दौरान पहले चुनाव में जब पार्टी का शानदार प्रदर्शन देखा, तो मुझे अहसास हुआ कि वो नाम बिल्कुल ठीक था। वह नाम आम लोगों को अपनेपन का अहसास करा गया। बतौर यादव, मुझे अच्छा लगा कि उस वक्त कोई दूसरा नाम तय नहीं हुआ। 2015 में आम आदमी पार्टी ने 70 में से 67 सीट लेकर सबको हैरान कर दिया था.

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