ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

डिटेंशन सेंटर या जेल ?

देश में हर तरफ एक ही बात सड़क से सदन तक गूंज रही है , हर तरफ एक ही चर्चा है डिटेंशन सेण्टर की, लेकिन क्या आपको पता है, क्या होता है ये डिटेंशन सेण्टर ?

दरअसल एनपीआर और एनआरसी को लेकर देशभर में मचे बवाल के बीच हर किसी की जुबान पर एक नया शब्द चढ़ा हुआ है और वो है डिटेंशन सेंटर,पूरे देश में जबसे एनआरसी लाने की बात हुई है, तभी से डिटेंशन सेंटर पर चर्चा तेज हो गई है.

दरअसल असम में एनआरसी के तहत 19 लाख लोगों को अवैध अप्रवासी घोषित किया गया है. इन लोगों में से जो लोग खुद की नागरिकता साबित नहीं कर पाएंगे उन्हें डिटेंशन सेंटर में ही रखा जाएगा. अगर पूरे देश में एनआरसी लागू हुई तो पूरे देश में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों को इन्हीं डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगाविपक्ष जहां एनआरसी, सीएए और एनपीआर के खिलाफ अपने आंदोलन को तेज करने के लिए लोगों को डिटेंशन सेंटर का डर दिखा रहा है, वहीं सत्ता पक्ष डिटेंशन सेंटर को कांग्रेस सरकार की देन और सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक बता रहा है.देश में डिटेंशन सेंटर (हिरासत केंद्र) को लेकर घमासान मचा है, नागरिकता संशोधन कानून यानी एनआरसी ,एनपीआर को लेकर भ्रम की स्थिति के बीच अब डिटेंशन सेंटर के विरोध को लेकर विपक्षी दलों ने कमर कस ली है, सूत्रों के मुताबिक, देश के अलग-अलग राज्यों में पहले से ही डिटेंशन सेंटर्स स्थापित हैं,खास बात है कि यह पूरी तरह से कानूनी हैं और यह सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान में हैं.डिटेंशन सेन्टर कहीं जेल तो नहीं –

हिरासत केंद्रों को होल्डिंग सेंटर या ठहराव केंद्र भी कहा जाता है, जिन विदेशी नागरिकों की नागरिकता की पहचान और पुष्टि लंबित होती है, उन्हें यहां रखा जाता है, इस दौरान संबंधित देशों से उनके प्रपत्रों का सत्यापन किया जाता है फिर उन्हें उनके देशों में भेजा जाता है,फॉरेनर्स एक्ट 1946 केंद्र सरकार को यह अधिकार देता है कि वह किसी भी विदेशी नागरिक के किसी विशेष स्थान पर आने-जाने पर रोक लगा सकता है,और उस व्यक्ति को किसी एक जगह पर रोकने में सक्षम बनाता है।डिटेंशन सेंटर में जेल की तुलना में ज्यादा सुविधाएं वहां रहने वालों को मुहैया कराई जाती हैं. जेल में अपराधी या अपराध के आरोपी रहते हैं जबकि डिटेंशन सेंटर में वे विदेशी नागरिक जो भारत में अवैध रूप से घुस आए हैं या वैध दस्तावेजों के साथ भारत आने के बाद निर्धारित समयसीमा के बाद भी देश में ही रुके हुए हैं. उन्हें रखा जाता है. ये डिटेंशन सेंटर में तब तक रहते हैं जब तक कि इन्हें इनके देश वापस न भेज दिया जाए अथवा इन्हें भारत का नागरिक ही न मान लिया जाए.पिछले कुछ दशकों में कई राज्यों में यह डिटेंशन सेंटर अस्तित्व में आए हैं, दरअसल असम दिल्ली पंजाब राजस्थान पश्चिम बंगाल गुजरात और तमिलनाडु में भी डिटेंशन सेंटर हैं.

डिटेंशन सेंटर क्या अभी बनाया गया है ?

डिटेंशन सेंटर में रह कर निष्कासन का इंतजार कर रहे इन विदेशी नागरिकों के लिए गृह मंत्रालय ने जुलाई 1998 से राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए निर्देश जारी किए हैं। जिससे विदेशी नागरिकों की व्यक्तिगत उपलब्धता को सुनिश्चित किया जाए और यात्रा दस्तावेजों के तैयार होते ही उन्हें उनके देश भेज दिया जाए।
असम की जेलों को डिटेंशन सेंटर बनाने का फैसला 2009 में कांग्रेस सरकार ने लिया था. उस वक्त केंद्र में मनमोहन सिंह की सरकार थी. पी चिंदबरम गृह मंत्री थे और राज्य की कमान तरुण गोगोई के हाथ में थी. उस वक्त की सरकार ने घुसपैठियों की लिस्ट को लेकर कोर्ट में हलफनामा दाखिल किया था. घुसपैठिए गायब न हो जाए इस वजह से इन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा जाना था.अब तो आप अब समझ चुके होंगे ये जेल बिलकुल नहीं होता ये सिर्फ शरणार्थियों के लिए बना होता है.

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