ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

मनोज कुमार से भारत तक का सफ़र…

गुजरेजमाने के मशहूर अभिनेता मनोज कुमार का नाम आते ही देश प्रेम अपने आप जहन में आ जाता है।वैसे तो मनोज कुमार ने अपने बॉलीवुड कैरियर में अपनी अदायगी से दर्शकों को दीवाना बनाया है लेकिन देशभक्ति का नशा लोगों के सर चढ़कर बोला। उपकार, शहीद,पूरब और पश्चिम और क्रांति जैसी फिल्मों ने मनोज कुमार की छवि को एक देशभक्त का रूप दिया। इन फिल्मों में देशभक्ति की भावना को इतनी प्रबलता से दर्शाया गया है कि ये कई पीढ़ियों के लिए आदर्श बन गए।

मनोज कुमार का पूरा नाम हरीकृष्ण गिरी गोस्वामी है। उनका जन्म 24 जुलाई 1935 को एबटाबाद प्रांत ब्रिटिश इंडिया (अब पाकिस्तान) में हुआ था। उनके परिवार में पत्नी शशि गोस्वामी,दो बेटे विशाल और कुनाल। जब मनोज कुमार महज 10 साल के थे।तब बंटवारे की वजह से उनका पूरा परिवार राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में आकर बस गया। बचपन के दिनों में मनोज कुमार ने दिलीप कुमार की फिल्म शबनम देखी थी। फिल्म में दिलीप के किरदार का नशा ऐसा चढ़ा कि उन्होंने भी फिल्म अभिनेता बनने का फैसला कर लिया दिल्ली के मशहूर हिंदू कॉलेज से स्नातक की पढ़ाई करने के बाद बाद वह अभिनेता बनने का सपना लेकर मुंबई आ गए। मनोज कुमार ने कैरियर की शुरुआत 1957 में रिलीज फिल्म “फैशन” से की।1976 में प्रदर्शित फिल्म दस नंबरी की सफलता के बाद मनोज कुमार ने लगभग 5 वर्षों तक फिल्म इंडस्ट्री से किनारा कर लिया। 1981 में उन्होंने फिल्म क्रांति के जरिए दूसरी पारी शुरू की। मनोज कुमार ने अपने दौर के सभी नायकों और नायिकाओं के साथ काम किया। राजेंद्र कुमार और राजेश खन्ना के दौर में भी वह कामयाब रहे। हिंदी फिल्म जगत ने उनको एक ऐसे बहुआयामी कलाकार के तौर पर जाना जाता है। जिन्होंने फिल्म निर्माण के साथ-साथ निर्देशन,लेखन,संपादन और बेजोड़ अभिनय से भी दर्शकों के दिल में अपनी खास पहचान बनाई है।

हालांकि मनोज कुमार ने अपने कैरियर में रोमांस, हॉरर ड्रामा,कॉमेडी के रोल भी निभाए हैं।यह बात ओर है कि उनकी देश प्रेम को बढ़ावा देती फिल्मों को दर्शकों का खूब प्यार मिला है और इसी के चलते उनके चाहने वाले उन्हें मनोज कुमार की वजह भारत कुमार कहकर पुकारते हैं।

मनोज कुमार की प्रमुख फिल्में हिमालय की गोद में, हरियाली और रास्ता, वह कौन थी, शहीद,गुमनाम, दो बदन, साजन, पत्थर के सनम, अनीता, नीलकमल, आदमी, पूरब और पश्चिम, बेईमान,शोर,मेरा नाम जोकर,सन्यासी, दस नंबरी,क्रांति । चांद सी महबूबा..,पत्थर के सनम…,कोई जब तुम्हारा…, मेरे देश की धरती.., भारत का रहने वाला हूं.., तौबा यह मतवाली चाल.., दीवानों से यह मत पूछो.., उनकी फिल्मों के गानों ने आज भी लोगों के जहन में अपनी सदाबहार छवि बनाई हुई है।

1968 में उपकार को सर्वश्रेष्ठ फिल्म, सर्वश्रेष्ठ डायरेक्टर, सर्वश्रेष्ठ कहानी, सर्वश्रेष्ठ संवाद फिल्म फेयर अवार्ड से नवाजा गया।1975 में रोटी कपड़ा और मकान के लिए सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का अवार्ड।1999 में लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड ।1968 में फिल्म उपकार को बेस्ट फीचर फिल्म राष्ट्रीय अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।1992 में सर्वोच्च सम्मान पदम श्री ।2008 में राष्ट्रीय सम्मान राष्ट्रीय किशोर कुमार अवॉर्ड और 2012 में अमेरिका के न्यूजर्सी शहर में भारत गौरव अवार्ड से सम्मानित किया गया।

बॉलीवुड में मनोज कुमार एक ऐसी शख्सियत का नाम है। जिसने बॉलीवुड फिल्मों को एक नई दिशा दी। जिनकी फिल्मों ने देश प्रेम के साथ इंसानियत और उससे जुड़ी तमाम भावनाओं को लोगों के सामने पर्दे पर उतारा। हिंदी सिनेमा में उनका योगदान हमेशा याद किया जाता है और जाता रहेगा।

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