ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

“क्यों हारी भाजपा क्यों जीते सोरेन”

झारखंड में चुनावी नतीजे आते ही कांग्रेस का जोश हाई दिख रहा है। ठिठुरती हुई ठंड के बीच नेता पूरी गर्मजोशी के साथ केंद्र सरकार को निशाना बना रहे हैं। तो वहीं दूसरी तरफ सरकार भी हमला करने में पीछे नहीं हट रही हैं। लेकिन इन सबके बीच सवाल यह उठता है कि 5 साल सदी सरकार चलाने के बावजूद ऐसा क्या हुआ कि झारखंड में पार्टी चुनाव हार गई और तो और मुख्यमंत्री जी अपनी सीट भी नहीं बचा पाए। भाजपा ने नारा दिया था कि अब की बार 65 पर हालात नतीजे आते आते यह हो गई कि सीटों का आंकड़ा मात्र 25 के पार ही पहुंच पाया। वो कहते हैं ना कि “घमंड मत करना कभी अपनी तरक्की पर क्योंकि तकदीर बदलती रहती है शीशा वही रहता है पर तस्वीर बदलती रहती है”। और कुछ ऐसा ही होता है सत्ता की कुर्सी के साथ कुर्सी वही रहती है पर उस पर बैठने वाले बदलते रहते है।साल का यह कोई पहला मौका नहीं है जब बीजेपी का नारा पस्त दिखाई दिया इससे पहले महाराष्ट्र और हरियाणा में भाजपा का नारा फेल होता हुआ दिखाई दिया था ,,,लेकिन हरियाणा में पोस्ट पोल एलियंस के साथ सरकार बन गई पर महाराष्ट्र में प्री पोल एलाइंस ने साथ छोड़ दिया,, खैर महाराष्ट्र और हरियाणा तो पुराना वाकया है अभी बात हाल ही में हारे झारखंड चुनाव की करते हैं ऐसी कौन सी वजह हो गई कि झारखंड में बीजेपी को सत्ता गंवानी पड़ी।अगर कायदे से एनालिसिस किया जाए तो हारने के मुख्य 5 कारण सामने आते हैं।
1: मुख्यमंत्री का चेहरा आदिवासी नहीं।
2: पार्टी के नेताओ कि पार्टी के खिलाफ बगावत ।
3: हाल ही में पार्टी ज्वाइन किए नेताओ को टिकट देना ।
4: चुनाव से पहले आजसू से गठबंधन तोड़ना ।
5: जो कि सबसे मुख्य वजह वो ये कि राज्य चुनाव के मुद्धों की जगह राम मंदिर और धारा 370 का जिक्र बीजेपी के चुनाव रैलियों में होना।
शायद बीजेपी के हुक्मरानों को लगने लगा था कि राज्य के मुद्दे खत्म हो गए है और शायद यही कारण था कि आज झारखंड राज्य में बीजेपी का अस्थिव खत्म हो गया है।
तो वहीं दूसरी हेमंत सोरेन ने जल ,जंगल और जमीन के मुद्दों को चुनावी मैदान में उठाया जो कि झारखंड का सबसे अहम मुद्दा है ।हेमंत सोरेन ने नारा दिया अभी बार झारखंडी सरकार ।जो कि बिलकुल सही साबित हुआ जिसका नतीजा ये हुआ कि झारखंड में एक बार फिर जेएमएम की कांग्रेस के साथ सत्ता में वापसी हुई और बीजेपी के हाथ से एक राज्य और निकाल गया । अब देखना यह होगा कि इस चुनाव की हार से बीजेपी क्या सीख लेती है और दूसरे राज्यो के चुनाव में खुद को कैसे तैयार करती है ? देखना ये भी दिलचस्प होगा कि अगले 5 साल कांग्रेस के साथ मिलकर हेमंत सोरेन झारखंड का नेतृत्व कैसे करते है ,, जिन वादो और मुद्धो के साथ वो सत्ता में आए है क्या वो उनको पूरा कर पायेंगे या नहीं?

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