ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

Aspirants और Dark horse की लड़ाई, लोगों की जुबान पर आईं, अलग अलग दावे सुनिए.. .

Aspirants और Dark horse की लड़ाई (dark horse vs aspirants) :-

आपने tvf की aspirants तो देखी ही होगी,because मस्त है ना पर पता है आपको आजकल एक बड़ा विवाद सामने आ रहा है

(dark horse vs aspirants)  कि ये कहानी डार्क हॉर्स से प्रेरित है.

विवाद का कारण :+

 

but इसमें क्या सच है ये बताने से पहले aspirants की चर्चित कहानी पर बात कर ली जाए..

दरअसल कहानी की शुरूवात 3 दोस्तों से होती है जो राजेंद्रनगर में आईएएस की पढ़ाई कर रहे हैं,

एक नौकरी छोड़ कर आया,एक परिवार का बिज़नेस तो एक का सपना ही है आईएएस पर होता क्या है इससे जानने से अच्छा विवाद किस किस सीन को लेकर है इसपर भी बात कर ली जाए..

Because जिन्होने भी डार्क हॉर्स उपन्यास पढ़ा होगा, थोडा बहुत उन्हे सीन एक जैसा लगेगा,so कई लोग ये भी कह रहे हैं कि सीन एक जैसे नहीं हैं, पर वास्तविकता मानिए कहानी एक जैसी नहीं है पर कहानी की आत्मा वही है.

dark horse vs aspirants में समानता

डार्क हॉर्स में भी वही लड़का आईएएस बनता है जो थोडा कमजोर होता है, थोड़ा शांत होता है, aspirants में भी वह ही है.

ऐसा लगता है कि डार्क हॉर्स का अगला सीजन है ये, जिसे नए तरीके से गढ़ा गया है,

डार्क हॉर्स के चर्चित लेखक निलोत्पल मृणाल युवा साहित्य एकादमी से इसी उपन्यास की वजह से सम्मानित हुए पर aspirants के लेखक दीपेश जी भी मंझे हुए लेखक हैं,

उनकी कहानियों पर वेब सीरीज जोरदार बनती है पर जिस तरह से विवाद बढ़ता जा रहा है और इस सोच पर ना सिर्फ लेखक अलग अलग राय रख रहें हैं, उसी तरह लोगों में भी इसे लेकर अलग अलग राय है…

सबसे पहले aspirants के लेखक deepesh जी की बात पर गौर करते हैं :-

 सत्य का आग्रह

आज शाम हमने सोशल मीडिया पर एक ऐसा पोस्ट देखा जिसमें एस्पिरेंट्स के क्रिएटर्स और प्रोडूसर पर एक आरोप लगाया गया है की हमने उनकी किताब की कहानी को चुरा कर एस्पिरेंट्स शो बना दिया।

  • सबसे पहले मैं उनसे ये कहना चाहता हूँ, कि एक लेखक होने के नाते अगर किसी की कहानी को चोरी कर लिया जाये तो उससे बड़ा दुःख कोई नहीं होता। उससे बड़ा दुःख सिर्फ एक ही होता है ।

जब किसी लेखक की सालों की मेहनत पर एक दूसरा लेखक चोरी करने का आरोप डाले. और इसलिए मैं नीलोत्पल भाई को ये आश्वासन देना चाहता हूँ कि भाई मैं खुद आपको पूरी तरह से सहयोग करूँगा ताकि आप अपने और हमारे सत्य तक पहुँच पाएं।

अभी मैं मूक हूँ और दुःख से व्यथित, सिर्फ आप सबके साथ 3 चीज़े साझा कर रहा हूँ:

1. उन्होंने अपने पोस्ट में कहा है कि वो हमारे संस्थापक अरुणाभ कुमार, जिनसे वो पहली और आखिरी बार 9 फरवरी 2020 में मिलें और कहा कि “डार्क हॉर्स पर कुछ बन सकता है…” और यह सुनने के बाद हमने यूपीएससी पर एस्पिरेंट्स शो बना दिया. मैं लोगो को ये बताना चाहूंगा कि इस मुलाक़ात से पूरे 13 महीने पहले 11 जनवरी 2019 को हमने एस्पिरेंट्स की कहानी मेल पर पूरी टीम के साथ शेयर कर ली थी, और ये उससे भी कई महीनों पहले की मेहनत थी, जिसका स्क्रीनशॉट आप सब देख सकते हैं.

2. वो खुद ये कह रहे हैं कि एस्पिरेंट्स और डार्क हॉर्स में सिर्फ 30% समानता है, 70% डिफरेंसेस। मैं उनको ये बताना चाहूंगा कि हर यूपीएससी एस्पिरैंट जो दिल्ली में जा कर तैयारी करते हैं उनके जीवन में 30% नहीं बल्कि 50% से ज्यादा समानता होती है. और उन्होंने इस बात को भी ध्यान में नहीं रखा कि इस शो के निर्देशक खुद एक यूपीएससी एस्पिरैंट रह चुके हैं, और उन्होंने इस शो को बनाने में अपना पूरा संघर्ष और जीवन डाल दिया।

3. चोरी का और समानता का संदेह होना और आगे आकर अपने हक़ के लिए सवाल करना हर लेखक का उचित अधिकार है, किन्तु उस चीज़ को चोरी का आरोप लगाकर जनता को एक निष्कर्ष देना शायद उचित नहीं।

 

Aspirants vs dark hosre
aspirants तो देखी ही होगी, मस्त है ना पर पता है आपको आजकल एक बड़ा विवाद सामने आ रहा कि ये कहानी डार्क हॉर्स से प्रेरित है, इसमें क्या सच है

 

इसके बाद डार्क हॉर्स के लेखक निलोत्पल मृणाल जी की बातों पर भी गौर करते हैं :- क्या सच में “एस्पिरेंट” की सीरीज डार्क हॉर्स की कॉपी है?
तो हाँ है।
और ये दावा हवा-हवाई नहीं है।सीरीज देख के,सोच के,खोज के तब ये दावा है।

अगर किसी को ये संदेह है कि ये कॉपी कैसे है तो ये बात पॉइंट-टू-पॉइंट एक-एक कर लिख के ही कानून की शरण में जाऊंगा।

मेरा मुर्गा चोरी हुआ है,but आप कड़ाही में बना चिकन मसाला दिखा कर ये कहते हुए हुए “आप अपने मुर्गा का शक्ल दिखाईये,फोटो दिखाईये और मिला के देखिये कि क्या इस चिकन मसाला से उसकी शक्ल मिलती है?”
इस भोले तर्क से आप मुर्गे की चोरी नहीं झूठला सकते न साहब।
तब तो दुनिया की हर कहानी को ये बता कि ” कुछ चीज तो मिलता ही है।हर कहानी में होता है।” ये सब बता तो फिर कहानी के मूल,उसकी आत्मा की चोरी,उसके मर्म की चोरी जैसे दावे ही खत्म कर देंगे आप कॉपीराइट कानून से?
हमारा जो भी दावा है वो,कानून और कॉपीराइट के विशेषज्ञों से राय और तर्क ले के ही है।

कॉपीराइट में ये नहीं होता कि कोई कहानी पंक्ति ब पंक्ति और वाक्य-वाक्य चोरी हो,दृश्य-दृश्य चोरी हो,संवाद दर संवाद चोरी हो तभी चोरी मानी जायेगी।

ये भी गौर करने वाली बात है कि “डार्क हॉर्स(2015) में छपने से पहले तक आपके-हमारे मोबाईल में upsc से संबंधीत कितने मीम आते थे?

यू टयूब पे कितने वीडियो बनते थे upsc और मुखर्जी नगर/ओल्ड राजेंद्र नगर पर ? कितने पेज थे fb पे? इंस्टा पे?
इस साफ-साफ सार्वजनिक बात को मान लेने में कोई ईगो नहीं लाना चाहिए कि dark horse vs aspirants हिन्दी पट्टी की दुनिया में upsc के छात्रों की कहानी और उसके संघर्ष को डार्क हॉर्स के ही लाखों पाठकों ने बहस और गॉसिप का विषय बनाया।

ये किताब ही पहली किताब थी हिन्दी की,जिसने मुम्बई के गलियारे जा upsc के छात्रों की जिंदगी को पर्दे का कच्चा माल बताया।निर्माताओं का भी ध्यान खिंचा।

लोगों को बताया कि ” इस विषय पे फिल्म/सीरीज बने,ये विषय अनछुआ सा है।”…..
और ये सब बातें हवा-हवाई नहीं है। सार्वजनिक मंच है,तारीख दर तारीख जाँच कर लिजिए।

पूछिये इन फिल्म/सीरीज वालों और upsc के छात्रों की जिंदगी पे किताब लिखने वाले स्क्रिप्ट राईटर भाई लोग से कि ” 2015 के पहले,डार्क हॉर्स के पहले” कहाँ थे? क्या तब मुखर्जी नगर नहीं था? या तब इन छात्रों के जीवन में संघर्ष नहीं था?

था…था….था…तब भी था..पर किसी कलम या कैमरे की नजर नहीं थी। वो आँख मिली “डार्क हॉर्स” से..चाहे उसका लेखक किसी को बेहद नापसंद आने वाला व्यक्ति” नीलोत्पल मृणाल” ही क्यों नहीं हो।

अब ये सच है कि ये संयोगवश ही हुआ,पर हुआ तो।

खैर अब लड़ेंगे। मैं डार्क हॉर्स के उन लाखों पाठकों से,आप सब उन दोस्तों से जिन्होंने मुझे एक पहचान दी,डार्क हॉर्स को एक मुकाम दिया…आप सब से हाथ जोड़ इस लड़ाई में सहयोग मांगता रहूँगा।

ये वक़्त तो कोरोना जैसी बहुत बड़ी विपदा से लड़ने का था,लड़ भी रहे थे आप-हम सब। पर इसी विपदा को अवसर बना tvf ने किसी कहानी की आत्मा चोरी कर अपने लिये अवसर निकाला है तो यही सही..एक लड़ाई इनसे भी चलेगी।

स्वागत है unअकेडमी और tvf का….मैदान में मिलते हैं। मेरा एक सपना मारा गया है,मेरे सपने की चोरी हुई है..अंजाम नहीं जानता..बस लड़ेंगे तो जरूर।जय हो।

तो देखा आपने किस तरह से दोनों लेखक (dark horse vs aspirants) अपनी अपनी बातों पर अड़ें हैं, जनता भी बट गई है ,अब आखिरी फैसला कानून का होगा इसपर वो क्या कहते हैं, पर आप सभी कमेंट से सेक्शन में हमें बता सकते हैं कि आपकी राय क्या है ?

लेखक : दिव्यांश यादव.

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