ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

“इतिहास जामिया का”

Jamia Milia Islamia 15 दिसंबर की रात से आप लगातार इस संस्था के बारे में टीवी चैनल और अखबारों में पढ़ और सुन रहे होंगे।वो हिंसा की तस्वीरें टूटे हुए कांच के टुकड़े आग में धधकते हुए वाहन और खौफ खाए छात्र-छात्राओं की तस्वीरें भी आप के मन को विचलित करती रही होगी। अगर आप की याददाश्त पक्की हो तो एक इनकाउंटर वाला सीन भी याद आता है जो जमिया के पास हुआ था और जिसको भी cab और nrc से जोड़ने की कोशिश की गई थी। जामिया क्या है और क्यों अक्सर ये सुर्खियों में रहता है ? जामिया का इतिहास क्या है ? इन सब सवालों के जवाबों को तलाशने के लिए आपको घड़ी की सुइयां को पीछे करना होग,,,, इतना पीछे कि जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म ही नहीं हुआ था यह कह लीजिए कि इतना पीछे कि तब देश के पहले प्रधानमंत्री नेहरू ने सत्ता का कामकाज भी नहीं संभाला था। साल था 1875 का जब सर सैयद अहमद खान ने यूपी के अलीगढ़ में मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना की थी। वह चाहते थे कि भारत के मुसलमानों को आधुनिक शिक्षा मिले। वो जानते थे कि की 1857 की क्रांति के बाद मुसलमान अंग्रेजों के निशाने पर आ गए थे और शायद यही वजह थी कि वक्त के बदलते दौर के साथ एमओयू में ऐसे गुट बनने लगे जो अंग्रेजी सत्ता के तरफ झुके हुए थे 1906 में जब ऑल इंडिया मुस्लिम लीग बनी तो इसने देश में हो रहे हिंदू मुस्लिम द्वंद को बढ़ाने का काम किया। लीग को अंग्रेजी सत्ता को समर्थन किसी से छुपा हुआ नहीं था।हिंदू और मुसलमान अलग-अलग दिशा में जाने लगे तो अंग्रेजी हुकूमत को लगा कि वह देश को इसी तरह से बैठकर लंबे समय तक अपना गुलाम बना कर रख पाएंगे।लेकिन महात्मा गांधी यह सब होता देख रहे थे जब उन्होंने असहयोग आंदोलन शुरू किया तो उन्होंने खिलाफत आंदोलन भी शुरू किया। आलोचक चाहे कुछ भी कहें लेकिन जो बात सत्य है वह यह कि गांधीजी हिंदू मुसलमान को अलग नहीं होने देना चाहते थे । दोनों आंदोलनों के निशाने पर थी अंग्रेजी हुकूमत।गांधीजी ने नारा दिया था जिस शिक्षण संस्था को अंग्रेजी हुकूमत चलाती है या जिसका समर्थन करती है उसको छोड़ दें जो कि एक मील का पत्थर साबित हुआ। फिर साल आया 1920 का यह साल था जिसके कानून ने मुस्लिम एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी बना दिया।इसी साल गांधीजी के पुकार पर एएमयू के कई काबिल प्रोफेसर और छात्रों नेअंग्रेजी सरकार से अपना साथ छोड़ने की बात कही इसी दरमियान कई प्रोफेसर ने कॉलेज भी छोड़ दिया। गांधीजी रघुपति राजा राम कहते थे, पर उनके कहने पर देश के कई काबिल मुसलमान इकट्ठा हुए और 29 अक्टूबर 1920 में अलीगढ़ में जामिया की नींव रखी ।जामिया मिलिया इस्लामिया,,, इसका मतलब जानते हैं आप अगर नहीं तो आपको बता दें राष्ट्रीय मुस्लिम विश्वविद्यालय, NATIONAL ISLAMIC UNIVERSITY तीन भाषाओं के नाम और नाम में धर्म से पहले राष्ट्र का जिक्र। राष्ट्र तब कैसा होगा किसी को नहीं मालूम था पर एक उम्मीद थी सपना था। फिर साल आया 1925 का जब जामिया यूपी के अलीगढ़ से दिल्ली के करोल बाग आ गया । पैसे की तंगी के कारण गांधीजी ने कहा कि अगर मुझे कटोरा लेकर भीख मांगना पड़े तो मैं वह भी कर लूंगा लेकिन किसी भी हाल में जामिया नहीं बंद होना चाहिए।इसी जामिया ने आजादी के आंदोलन के दौरान गांधीजी के भरोसे को बनाए रखने की पूरी कोशिश की। साल 1928 में सरदार पटेल के नेतृत्व में  बारदोली  सत्याग्रह हुआ, तब जामिया के वॉलिंटियर्स पूरे देश में घूम-घूम कर लोगों को आजादी की लड़ाई के बारे में जागरूक करते नजर आए जामिया ने हमेशा से सौहार्द का समर्थन किया। लेकिन आज उसी जामिया से आई हिंसा की तस्वीरें अंतरात्मा को झकझोर देती है।जिस विश्वविद्यालय के लिए गांधीजी कटोरे में भीख मांगने की बात कहते थे आज उसी विश्वविद्यालय में रहम के लिए भीख की मांग उठी है।

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