ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

कहां से उठी थी नक्सल रूपी चिंगारी, जो पूरे भारत में आग की तरफ फैल रहा है?

How Naxalism has changed Over the Years!

अभी हाल ही में दूरदर्शन की कैमरामैन और दो जवानों की निर्मम हत्या कर दी गई नक्सलियों द्वारा , उनका दोष सिर्फ यही था कि वो दंतेवाड़ा  हेलो खेल क्षेत्र में चुनाव की कवरेज के लिए गए थे, नक्सलियों की नजर में उनका दोष सिर्फ इतना था वह दिखाना चाहते थे कि :::::::

 लोकतंत्र हार नहीं सकता ,
गोलियों की बौछार से,
क्या कर्ण डरा था,
अर्जुन के ?धनुष की टंकार से

How-Naxalism-has-changed-Over-the-Years नक्सलवाद का कुरूप चेहरा (The Real Face Of Naxalism):
नक्सलवाद  अधैर्य की वो उपज है, जिसकी बस्ती में मानवता का मतलब मौत है,नक्सलवाद वह फसल है जिसकी जड़ों में खून रिसता है,नक्सलवाद का जन्म सिस्टम की खामियों को दूर करने के लिए हुआ था पर यह राजनीति की भेंट चढ़ गया !

नक्सलवाद की शुरुआत (Cause of Naxalism in India):
एक वक्त था यह समाज ऊंच-नीच भेद-भाव से भरा पड़ा था, किसानों की दुर्दशा चरम पर थी सन 1967 में हर जगह उपेक्षा से परेशान पश्चिम बंगाल West Bengal के नक्सलबाड़ी Naxalbari गांव के किसानों ने इस दुर्दशा का जिम्मेदार सरकार की गलत नीतियों को समझा, धीरे-धीरे यह विद्रोह हिंसक होता गया जो आज तक देश को खोखला करता आ रहा है !

नक्सलवाद के जनक (Father of the Naxal Movement):

चीन में हुए कम्युनिस्ट आंदोलन से प्रेरणा पाकर भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के नेता चारु मजुमदार Charu Mazumdar और कानू सान्याल Kanu Sanyal ने 1967 में सत्ता खिलाफ एक सशस्त्र आंदोलन की शुरुआत की।
उनका मानना था कि भारतीय मजदूरों और किसानों की दुर्दशा के लिए सरकारी नीतियां ही जिम्मेदार हैं, जिसकी वजह से उच्च वर्गों का शासन तंत्र पर वर्चस्व स्थापित हो गया है और इसे केवल बंदूक के दम पर ही समाप्त किया जा सकता है ।

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Source: Google Images

सन 1971 में यह आंदोलन दो भागों में बट गया, तब एक गुट का नेतृत्व सत्यनारायण सिंह Satyanaran Singh ने किया, यह गुट सरकार के खिलाफ बंदूक के बल पर सत्ता को हासिल करना चाहता था ।

तथा दूसरा गुट जिसकी अगुआई चारू मजूमदार Charu Majumdar ने की थी ,इस गुट ने सरकार के खिलाफ एक राजनीतिक पार्टी बनाई ।

एक जन आंदोलन ने कैसे किया राजनीति का रुख: (what is Naxalism)

सन 1972 में आंदोलन के हिंसक हो जाने के कारण चारु मजूमदार को गिरफ्तार कर लिया गया और 10 दिन के कठोर कारावास के दौरान की जेल में ही मौत हो गई तथा उनके साथी कानू सान्याल ने आंदोलन को हिंसक होते देख तंग आकर 23 मार्च 1972 को आत्महत्या कर ली ! सन 1971 के आंतरिक विद्रोह और मजूमदार की मृत्यु के बाद आंदोलन अपने लक्ष्य से भटक गया ।
नक्सली चीन की कम्युनिस्ट नेता माओत्से तुंग के बड़े प्रशंसक थे इसी कारण इसे माओवाद कहा जाता है ।

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Source: Google Images

भूमि अधिग्रहण को लेकर देश में सबसे पहले आवाज नक्सलबाड़ी से शुरू हुआ ,इस आंदोलन ने लोगों के मन को ऐसे बदला कि जब पश्चिम बंगाल में कांग्रेस की सत्ता ही बाहर हो गई, और वह आज तक सत्ता में वापस आना सकी !

इस आंदोलन के कारण ही पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्ट पार्टी सरकार के रूप में आई और 1977 में ज्योति बसु मुख्यमंत्री बने !

जब यह आंदोलन बिहार पहुंचा तब यह राजनीति की भेंट चढ़ गया और यह जमीनी लड़ाई ना रहकर जातीय वर्ग की लड़ाई बन गयी !

नक्सलियों के विरुद्ध चलाए गए कुछ अभियान:

०  स्टीपेलचेस अभियान Steeplechase Movement :
 यह अभियान 1971 में चलाया गया इस अभियान में भारतीय सेना तथा राज्य पुलिस ने भाग लिया था , इसमें लगभग 20000 नक्सली मारे गए थे !

  ग्रीन हंट अभियान :Green Hunt Movement

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Source: Google Images

 या अभियान वर्ष 2009 में चलाया गया, नक्सल विरोधी इस अभियान का नाम मीडिया द्वारा प्रदान किया गया !

प्रहार :PRAHAAR

3 जून 2017 को छत्तीसगढ़ राज्य के सुकमा जिले में सुरक्षाबलों द्वारा अब तक के सबसे बड़े नक्सल विरोधी अभियान प्रहार का आरंभ किया गया , इस अभियान में 3 जवान शहीद हो गए और तकरीबन 15 से 20 नक्सलियों के मारे जाने की सूचना सुरक्षा बल के अधिकारियों द्वारा दी गई !,खराब मौसम के कारण 25 जून 2017 को इस अभियान को समाप्त करना पड़ा !

 नक्सलवाद पर निष्कर्ष :

नक्सलवाद भारत की प्रमुख समस्या है, नक्सली दीमक की तरह इस देश को खोखला करते आ रहे हैं , अगर सरकार ने किसानों की समस्याओं को सुना होता तो आज यह दिन नहीं आता कि अपने ही अपने कि खून के प्यासे बन जाते ।

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