ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

इतिहास अयोध्या का!!!

अयोध्या यूपी की राजनीति का एक लोकप्रिय मुद्दा न जाने कितने चुनाव हुए और न जाने कितने चुनावी घोषणा पत्र का यह हिस्सा रहा जाने कितनी सरकारों ने वादा किया कि हम राम मंदिर बनाएंगे और न जाने कितनी सरकार इसी मुद्दे के दम पर बने लेकिन वक्त बदला सरकारें बदली पर इस मुद्दे का हल ना निकल सका न जाने कितने सालों तक यह यूपी का अहम मुद्दा अदालतों के चक्कर लगाता है तभी अयोध्या हाईकोर्ट से मंजूरी मिली तो सुप्रीम कोर्ट में मामला खींचा लेकिन आज वह दिन आया जब इस राजनीतिक मुद्दे का एक निष्कर्ष निकल कर आया और निष्कर्ष भी ऐसा जिसमें दोनों पक्षों की जीत हुई एक सदा हुआ निर्णय जिसने हर व्यक्ति का सम्मान रखा और भारत की एकता को दुनिया के सामने फिर से पेश किया। आज हम आप को बारीकी से और साल दर साल बताएंगे कि आखिरकार अयोध्या में हुआ के जाने के लिए इस पोस्ट को पूरा पढ़ें।आइए आपको बताते हैं कि अयोध्या में विवाद कब से शुरू हुई और कब-कब क्या हुआ।
साल 1528: मुगल बादशाह बाबर ने (विवादित जगह पर) मस्जिद का निर्माण कराया। इसे लेकर हिंदुओं को दावा है कि यह जगह भगवान राम की जन्मभूमि है और यहां पहले एक मंदिर था।
साल 1853-1949 तक: 1853 में इस जगह के आसपास पहली बार दंगे हुए। 1859 में अंग्रेजी प्रशासन ने विवादित जगह के आसपास बाड़ लगा दी। मुसलमानों को ढांचे के अंदर और हिंदुओं को बाहर चबूतरे पर पूजा करने की इजाजत दी गई।

साल 1949: असली विवाद शुरू हुआ 23 दिसंबर 1949 को, जब भगवान राम की मूर्तियां मस्जिद में पाई गईं। हिंदुओं का कहना था कि भगवान राम प्रकट हुए हैं, जबकि मुसलमानों ने आरोप लगाया कि किसी ने रात में “‘चुपचाप मूर्तियां वहां रख दीं। यूपी सरकार ने मूर्तियां हटाने का आदेश दिkk hiiiया, लेकिन जिला मैजिस्ट्रेट के. के. नायर ने दंगों और हिंदुओं की भावनाओं के भड़कने के डर से इस आदेश को पूरा करने में असमर्थता जताई। सरकार ने इसे विवादित ढांचा मानकर ताला लगवा दिया।
साल 1950: फैजाबाद सिविल कोर्ट में दो अर्जी दाखिल की गई। इसमें एक में राम लला की पूजा की इजाजत और दूसरे में विवादित ढांचे में भगवान राम की मूर्ति रखे रहने की इजाजत मांगी गई। 1959 में निर्मोही अखाड़ा ने तीसरी अर्जी दाखिल की।

साल 1961: यूपी सुन्नी वक्फ बोर्ड ने अर्जी दाखिल कर विवादित जगह के पजेशन और मूर्तियां हटाने की मांग की।

साल 1984: विवादित ढांचे की जगह मंदिर बनाने के लिए 1984 में विश्व हिंदू परिषद ने एक कमिटी गठित की।
साल 1986: यू. सी. पांडे की याचिका पर फैजाबाद के जिला जज के. एम. पांडे ने 1 फरवरी 1986 को हिंदुओं को पूजा करने की इजाजत देते हुए ढांचे पर से ताला हटाने का आदेश दिया।

6 दिसंबर 1992: बीजेपी, वीएचपी और शिवसेना समेत दूसरे हिंदू संगठनों के लाखों कार्यकर्ताओं ने विवादित ढांचे को गिरा दिया। देश भर में हिंदू-मुसलमानों के बीच दंगे भड़के गए, जिनमें 2 हजार से ज्यादा लोग मारे गए।

साल 2002: हिंदू कार्यकर्ताओं को ले जा रही ट्रेन में गोधरा में आग लगा दी गई, जिसमें 58 लोगों की मौत हो गई। इसकी वजह से हुए दंगे में 2 हजार से ज्यादा लोग मारे गए।

साल 2010: इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अपने फैसले में विवादित स्थल को सुन्नी वक्फ बोर्ड, रामलला विराजमान और निर्मोही अखाड़ा के बीच 3 बराबर-बराबर हिस्सों में बांटने का आदेश दिया।

साल 2011: सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या विवाद पर इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाई।

साल 2017: सुप्रीम कोर्ट ने आउट ऑफ कोर्ट सेटलमेंट का आह्वान किया। बीजेपी के शीर्ष नेताओं पर आपराधिक साजिश के आरोप फिर से बहाल किए।

8 मार्च 2019: सुप्रीम कोर्ट ने मामले को मध्यस्थता के लिए भेजा। पैनल को 8 सप्ताह के अंदर कार्यवाही खत्म करने को कहा।

1 अगस्त 2019: मध्यस्थता पैनल ने रिपोर्ट प्रस्तुत की।

2 अगस्त 2019: सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मध्यस्थता पैनल मामले का समाधान निकालने में विफल रहा।

6 अगस्त 2019: सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की रोजाना सुनवाई शुरू हुई।

16 अक्टूबर 2019: अयोध्या मामले की सुनवाई पूरी। सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा।
9 नवंबर 2019 वह दिन आया जिस दिन अयोध्या का फैसला हुआ और फैसला ऐसा जिसने गंगा जमुना तहजीब को बरकरार रखा सुप्रीम कोर्ट ने अपना फैसला सुनाया कि विवादित स्थल पर यह पाया गया है कि राम मंदिर 2.72 एकड़ की जमीन में राम मंदिर बनेगा और जिसके लिए सरकार को एक ट्रस्ट बनाने का आदेश दिया और समय सीमा निर्धारित की 3 महीने की और उसके साथ-साथ मस्जिद बनाने के लिए कोर्ट ने आदेश दिया सरकार 5 एकड़ की जमीन मुस्लिम लोगों को दे देशवासियों इसका स्वागत किया और आज की तारीख को इतिहास बना कर स्वर्ण अक्षरों में दर्ज कराया। भारत एडवांस इतिहास का गवाह बना जहां एक बार फिर एकता का संदेश भारत पूरी दुनिया को दिया।

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