ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

कहानी उस महान वैज्ञानिक की जिसने एक देश का राष्ट्रपति पद ठुकरा दिया था!!

कहते हैं मेहनत अगर सच्चे मन से की जाए तो सफलता आपके कदम चूमेगी। कुछ ऐसे ही कहानी थी थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी से दुनिया के नियमों को समझाने वाले आइंस्टीन की।आइंस्टीन जितने बड़े वैज्ञानिक थे उतने ही बड़े दार्शनिक भी थे उनके सिद्धांत साइंस की दुनिया के साथ-साथ आम जिंदगी में भी सही साबित होते थे उनका मानना था कि कई बार सफलता असफलता कल्पना और ज्ञान के आधार पर आप कठिनाइयों से पार पा सकते हैं और जिंदगी मैं आगे बढ़ सकते हैं।
लेकिन क्या आपने कभी सोचा कि आइंस्टीन ने यह अर्श से लेकर फर्श तक का सफर कैसे तय किया होगा और कैसे वह दुनिया के 1 महान वैज्ञानिक बने। तो चलिए आज आपको बताते हैं अल्बर्ट आइंस्टाइन की जिंदगी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य आइंस्टीन का जन्म 14 मार्च1879 को हुआ था उसी साल एक महान वैज्ञानिक जेम्स मैक्सवेल का निधन हुआ था। जिसका मतलब है कि जिस साल एक महान वैज्ञानिक इस दुनिया छोड़कर जा रहा था तो वहीं दूसरा महान वैज्ञानिक जन्म लेकर साइंस की दुनिया में एक नया इतिहास लिखने वाला था। आप सोचते होंगे कि आइंस्टीन जैसे महान वैज्ञानिक स्कूलों के दिनों से ही पढ़ने में अव्वल रहे होंगे ।लेकिन मेरे दोस्त ऐसा नहीं था आपको बता दें कि स्कूल के दिनों में आइंस्टीन पढ़ने में बहुत कमजोर थे वह क्लास के अंदर कम बाहर ज्यादा नजर आते थे।आपको यह जानकर हैरानी होगी आइंस्टीन ने अपने स्कूली सफर की शुरुआत 7 साल की उम्र में की थी। उनके टीचर अक्सर उनको मंदबुद्धि वाला कहते थे लेकिन शायद उनको यह नहीं पता था कि 1 दिन यह मंदबुद्धि का लड़का एक महान वैज्ञानिक बनेगा और नोबेल प्राइज जैसे सर्वोच्च पुरस्कार से नवाजा जाएगा।इस महान वैज्ञानिक ने 4 साल की उम्र तक कुछ नहीं बोला था जिसको लेकर उनके माता-पिता काफी चिंतित रहते थे। 1 दिन की बात है जब आइंस्टाइन अपने पैरंट्स के साथ डिनर पर बैठे थे और वह बिल्कुल शांत थे जैसा वह अमूमन 4 साल की उम्र तक रहते थे। सब कुछ सामान्य था और उनके माता-पिता को भी यह नहीं पता था कि आज पहली बार उनका बेटा चुप्पी तोड़ेगा और कहेगा कि सूप बहुत गर्म है।महान वैज्ञानिक आइंस्टीन कभी जुराब  नहीं पहनते थे क्योंकि उनकी उंगलियां इतनी लंबी थी कि  जुराब  फट जाती थी,आपको यह जानकर हैरानी होगी कि साइंस के इतने बड़े महारथी को कार चलाना नहीं आता था और समुद्री जहाज का शौक रखते थे।
आइंस्टीन वैसे तो अपनी थ्योरी ऑफ रिलेटिविटी के लिए जाने जाते हैं पर यह बहुत कम लोग जानते हैं कि उन्हें नोबेल प्राइज थ्योरी ऑफ इलेक्ट्रॉन की खोज के लिए मिला था।आप यह जानकर हैरान होंगे कि एक जीनियस होते हुए आइंस्टीन की याददाश्त बहुत कमजोर थी वह अक्सर तारीख दिन और फोन नंबर भूल जाया करते थे,उनका मानना था कि जो चीज किताबों में ढूंढने से आसानी से मिल जाए उसको याद रखने से क्या फायदा।  साल था 1999 का जब आइंस्टीन की मृत्यु के बाद टाइम्स मैगजीन ने उन्हें मैन ऑफ द ईयर के टाइटल से नवाजा था और उनकी तस्वीर को अपनी मैगजीन के प्रथम पेज पर लगाया था। हर इंसान की चाहत होती है कि वह इस जिंदगी में ऐसे मुकाम पर जहां उसकी एक अलग पहचान हो पर आइंस्टीन इन सब सोच से बिल्कुल अलग थे और शायद यही कारण था जब 1952 में उन्हें इजरायल का राष्ट्रपति बनाने की पेशकश की थी परंतु उन्होंने यह कहकर ऑफर ठुकरा दिया था कि वह राजनीति के लिए नहीं बनी है बल्कि साइंस के लिए बने हैं।आपको यह जानकर हैरानी होगी कि आइंस्टीन अपने ऑटोग्राफ के लिए $5 लेते थे तो वही भाषण के लिए हजार डॉलर लेते थे और वह ऐसा इसलिए करते थे क्योंकि वह अपनी इस पूरी कमाई को गरीबों के लिए दान कर देते थे।आइंस्टीन की मृत्यु से 1 साल पहले लिखा गया उनका एक पत्र 20 करोड़ 30 लाख का बिका, यह 2 पन्नों का पत्र उन्होंने 3 जनवरी 1954 को जर्मनी के हार्ड स्किन स्क्लॉगइन को लिखा था क्योंकि उन्होंने आइंस्टीन को अपनी किताब भेंट स्वरूप दी थी। आइंस्टीन की मृत्यु के बाद एक डॉक्टर ने उनके दिमाग पर रिसर्च करने के लिए उनके दिमाग को निकाल लिया था वह भी उनकी परिवारजनों से पूछे बगैर जिसके चलते उस डॉक्टर को नौकरी से निकाल दिया गया।आइंस्टीन के दिमाग की लेकिन फिर भी तफ्तीश हुई और तफ्तीश में पाया गया कि उनके दिमाग में आम आदमी से ज्यादा सेल्स हैं जो इस बात की गवाह है कि वह लोगों से अलग सोचते हैं ।वह चाहते तो कुछ दिन और भी जीवित रह सकते थे क्योंकि जब उनके डॉक्टर ने ऑपरेशन के लिए कहा तो उन्होंने यह कहकर मना कर दिया  कि आर्टिफिशियल जिंदगी जीने का कोई फायदा नहीं है। अफसोस की बात तो यह है जब उनकी मृत्यु हुई तब उन्होंने फ्रेंच भाषा में कुछ अल्फाज कहे थे लेकिन जो व्यक्ति उनके साथ मौजूद था उसको फ्रेंच भाषा का जरा भी ज्ञान नहीं था,और उनके वह आखरी शब्द उनकी मौत के बाद राज बन गये,ये भी सच है कि जैसे अद्भुत वे  थे वैसे ही उनकी जिंदगी से जुड़े किस्से हैं,अगर आपका कोई सुझाव हो तो अपनी राय हमें कमेंट बॉक्स में जरूर दें

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