ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

कहानी उस भारतीय उड़नपरी की जिसका मेडल उससे छीन लिया गया

Story of that famous Indian athlete from south India whose medal was Stripped.

कहानी उस भारतीय उड़नपरी की जिसका मेडल उससे छीन लिया गया

अभी-अभी एशियन गेम्स 2018 समाप्त हुए हैं, प्रदर्शन के लिहाज से देखा जाए तो इस बार ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धा में भारत ने कमाल का प्रदर्शन किया है,
जिस भारत में अब तक क्रिकेट का ही बोलबाला चलता रहा, आज सोशल मीडिया के युग में ट्रैक एंड फील्ड जैसे स्पर्धाओं को भी नई पहचान मिली है।Santhi-Soundarajan-Cover
Hima Das, Swapna Barman, Dutee chand Jinshon Johnshon,Neeraj chopra आदि अनेक नाम लोगों के जबान पर हैं, भारत के छोटे छोटे कस्बों से निकलकर एथलीट आज भारत का नाम पूरे विश्व में रोशन कर रहे हैं, हमारी आज की कहानी भी कुछ ऐसी ही है, लेकिन यह कहानी उस दौर की है जब बस क्रिकेट का ही बोलबाला हुआ करता था,
DOHA Asian Games, भारत ने 10 गोल्ड मेडल अपने नाम किए थे, तब ना तो सोशल मीडिया द्वारा हमें कोई अपडेट मिला करती थी, ना ही Twitter Facebook द्वारा बधाइयों का तांता लगा करता था, हम लोगों के लिए सुबह का समाचार पत्र ही एकमात्र माध्यम हुआ करता था, भारत की गौरव गाथा जानने के लिए, तब Samresh Jung और Jashpal Rana भारत के लिए निशाना लगाया करते थे, तब leander Paesऔर Mahesh Bhupati जीत के बाद छाती लड़ाया करते।

Santhi-Soundarajan-Facts
Source: Google Images

वह लड़की जिसने दोहा एशियन गेम्स में झंडा गाड़ दिया था
उसी समय Tamilnadu एक दुबली पतली लड़की ने भारत को 800 मीटर में रजत पदक दिलवाया था।
नाम था,

Santhi Soundarajan तब वह एशियन गेम्स में पदक जीतने वाली तमिलनाडु की पहली महिला Athlete थी।

Sex Verification test में नाकामयाबी
लेकिन बाद में Sex Verification test पास ना करने की वजह से उनसे यह पदक छीन लिया गया।
इस पर सियासत भी बहुत हुई लेकिन परिणाम कुछ भी न निकला।
इतना सब कुछ होने के बाद Santhi Soundarajan Depression में चली गई और Sucide करने की कोशिश भी की। 

अभी उजाले की जगमगाहट खत्म ही नहीं हुई थी तब तब तक अंधियारे ने अपनी चादर फैला दी थी,
अब तक सरकार ने भी उनका साथ छोड़ दिया था, उन्हें एशियन गेम्स में जीत के बाद मिलने वाली थी वह भी बंद कर दी गई.
तब सन 2007 में Tamilnadu के मुख्यमंत्री एम करूणानिधि ने santhi के पदक छिन जाने के बावजूद भी 15 लाख रुपए की ईनामी राशि प्रदान की।
Santhi से भले ही उनका मेडल छीन लिया गया हो लेकिन उनके जज्बे को उनसे कौन छीन पाता.

Santhi-Soundarajan
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हार मानने वाला ज़ज़्बा

इनाम में मिली पैसे से उन्होंने Academy खोली,
सपना था धावकों की एक खेप तैयार करने की जो भारत का परचम पूरे विश्व में लहराए।
Santhi ने सरकार को बहुत बार खत लिखा बहुत बार अपील की लेकिन उनको निराशा ही हाथ लगी।
Santhi को अपने एकेडमी के बच्चों से बहुत ही उम्मीद है, और साथ में है उनका हार न मानने वाला जज्बा।
Santhi कहती है कि

“My legacy will remain not with my medals but with the determination and hope to overcome my past torment and my present struggles, I want to live my dream through my students.”
— Santhi Soundarajan

Santhi के हार न मानने वाले जज़्बे को हम तहे दिल से सलाम करते हैं।

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