ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

कहानी भारतीय रेलवे के उस Chartered Accountant कि जो आगे जाकर पाकिस्तान का पहला वित्त मंत्री बना

कहानी भारतीय रेलवे के उस Chartered Accountant कि जो आगे जाकर पाकिस्तान का पहला वित्त मंत्री बना

संघर्ष की राह में मुश्किलें तो बहुत ही आती हैं पर यह मुश्किलात हमें आगे बढ़ने का आईना भी दिखला जाती है।

India-Pakistan-Link-malik-ghulam-muhammad

Aligarh Muslim University मे पढ़ने वाला एक युवक  जिसने अपने संघर्ष और तेज दिमाग की बदौलत अपना एक अलग ही मुकाम हासिल किया।
Aligarh Muslim University से Graduation की डिग्री हासिल करने के बाद वह युवक भारतीय रेलवे में Chartered Accountant  के पद पर सुशोभित हुआ और आगे चलकर वही युवक पाकिस्तान का पहला वित्त मंत्री बना।
नाम था Malik Ghulam Muhammad, जिन्हें  ब्रिटिश सरकार ने Companion of the Order of the Indian Empire (CIE) से नवाजा था। यह साल था 1941

Malik Ghulam Muhammad बड़े अदब वाले व्यक्ति थे और इसी अदब की वजह से ही उनकी साख बढ़ती चली गई और यह कारवां बढ़ता चला गया।

  साल था 1945 जब Malik Ghulam Muhammad ने K.C Mahindra  और J.C Mahindra  के साथ मिलकर लुधियाना में एक स्टील कंपनी की नींव रखी।
नाम दिया “Mahindra & Muhammad”  जो आगे चलकर भारत की एक अग्रणी ऑटोमोबाइल कंपनी बनी, जिसे हम आज “Mahindra & Mahindra” के नाम से जानते हैं। आज यह कंपनी अरबों डॉलर का कारोबार करती है।
अब आप सोच रहे होंगे कि यह कंपनी “Mahindra & Muhammad” से “Mahindra & Mahindra”  कैसे बनी?
इस का किस्सा भी बहुत दिलचस्प है,
भारत- पाक बंटवारा  जिसने कितनों से उनके घर, उनके दोस्त, उनके रिश्तेदार, छीन लिए,  उसी भारत-पाक बंटवारे से इस कंपनी का बहुत ही गहरा ताल्लुक है।

बटवारे ने इस कंपनी पर ऐसा असर किया कि इसका नाम तक बदल दिया।
दरअसल हुआ यूं कि बंटवारे के बाद Malik Ghulam Muhammad  पाकिस्तान चले गए और वहां की सियासत में रम से गए, और इन्हीं सियासी गलियारों के इर्द-गिर्द घूमते हुए वह पाकिस्तान के पहले वित्त मंत्री बन गए
देश का बंटवारा हुआ तो कारोबार का भी बटवारा हो गया, और कंपनी का नाम “Mahindra & Muhammad” की जगह “Mahindra & Mahindra” हो गया। आज यह कंपनी किसी परिचय का मोहताज नहीं है।

Malik Ghulam Muhammad  यही नहीं रुके और सफलता उनके कदम चूमती गई।
Mahindra  परिवार से इनका कारोबारी रिश्ता तो टूट गया पर पारिवारिक रिश्ता जस का तस बना रहा।
सन 1947 से 1951 तक पाकिस्तान के वित्त मंत्री रहे।

इसके बाद वे सन 1951 से 1955 तक पाकिस्तान के Governor General  के पद पर सुशोभित रहे।
साल था  सन 1955 जब वह भारत आए, लेकिन एक आम पाकिस्तानी नागरिक बन कर नहीं बल्कि एक  मुख्य अतिथि के तौर पर और वो भी गणतंत्र दिवस की परेड पर।

Malik Ghulam Muhammad राजपथ पर  मुख्य अतिथि के तौर पर आने वाले पहले व्यक्ति थे।
अब आप सोच रहे होंगे कि गणतंत्र दिवस की शुरुआत तो सन 1950 से हुई,  जी हां आप बिल्कुल सही सोच रहे हैं।

सन 1950 से सन 1954 तक गणतंत्र दिवस समारोह
Irwin amphitheatre 
पर हुआ था। जो अब Dhyanchand National Stadium  के नाम से जाना  जाता है।
सन 1955 से गणतंत्र दिवस समारोह राजपथ पर होने लगा।

इस प्रकार Malik Ghulam Muhammad राजपथ पर मुख्य अतिथि के तौर पर आने वाले पहले  व्यक्ति हुए।


इसके साथ-साथ  वह पहले पाकिस्तानी व्यक्ति थे जो भारत में गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि के तौर पर आए।


कहते हैं कि जब वह दिल्ली आए तो पहला फोन केशव Mahindra की दादी को किया और उनका हालचाल पूछा

भले ही Mahindra & Muhammad कंपनी अब Mahindra & Mahindra हो गई हो,  लेकिन  दोनों परिवारों में यह दोस्ती का रिश्ता अगली पीढ़ियों तक चलता रहा। 
  तो यह थी कहानी उस दोस्त की जो भारत तो आया, और वह भी भारत का अतिथि बनकर इसके पीछे वजह थी उनका संघर्ष और उनकी मेहनत जिसके बल पर उन्होंने सफलता के शिखर को छुआ।

 

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