ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

सफर 2019 का!!!

Gregorian calendar के हिसाब से 2019 खत्म हो चुका है ,और 2020 का आरंभ हो चुका है ।वैसे तो ये पोस्ट कल करनी चाहिए थी पर सोचा कि आप लोग नए साल की मौज मस्ती में लगे होंगे खबरों पर इतना ध्यान नहीं देंगे तो सोचा आज पोस्ट करूं। सबसे पहले तो आपको नए साल की बहुत बहुत बधाई और शुभकामनाएं। पिछले साल आपने देश में कुछ नए बदलाव देखे कुछ नए कानून बने तो कुछ ऐसे वाक्ये हुए जिसने अंतरात्मा को झकझोर कर रख दिया कुछ बातें तो आपको ध्यान होंगी और कुछ आप भूल गए होंगे तभी हमने सोचा क्यों ना आपको साल के बीते हर एक किस्से को याद दिलाएं जो हमारे देश में बीते साल हुए। साल की शुरुआत हुई दिल को झकझोर देने वाली पुलवामा हमले से जब सेना की टुकड़ी के ऊपर जम्मू कश्मीर हाईवे पर हमला हुआ शहीदों के शवों को देखकर पूरे देश की आंखें रो पड़ी ,पूरे देश को जो चोट सी लगी थी इसका मरहम शायद किसी के पास नहीं था लेकिन तभी सेना के शौर्य और पराक्रम से एयर स्ट्राइक हुई जिसने देश के इस दर्द को थोड़ा सा कम किया। वो कहते हैं ना कि अक्सर साल का पहला और आखरी दिन तस्वीरों में रहता है इसीलिए याद कीजिए किसान की सबसे मजबूत तस्वीर देश के लिहाज से कौन सी होगी अगर आपकी माथे की नस दुख गई हो तो मैं आपको याद दिलवा दूं कि वह तस्वीर थी विंग कमांडर अभिनंदन वर्तमान कि जब वह पाकिस्तान से भारत वापस आए थे। पुलवामा हमले के बाद सीमा पर तनाव बढ़ने लगा था हमने एयर स्ट्राइक की तो पाकिस्तान ने भी ऐसा करने की कोशिश की लेकिन जब पाकिस्तान के जहाज भारत में आए तो उनको खदेरा गया इसी दरमियान अभिनंदन का विमान क्रैश हो गया और नतीजा यह हुआ कि अभिनंदन पाकिस्तान वाले कश्मीर में जा पहुंचे ।अभिनंदन पाकिस्तानी सेना के हत्थे चढ़ गये पूरा देश एक बार फिर चिंता के शोक में डूब गया लेकिन फिर तारीख आई कैलेंडर में 27 फरवरी 2019 की जिस दिन पाकिस्तान ने ऐलान किया कि वह अभिनंदन को सकुशल वापस लौटा देंगे।यह तो उनको करना ही था क्योंकि अभी घाव एयर स्ट्राइक का भरा ही नहीं था देश में कई कयास लगने लगे किसी ने मोदी के नेतृत्व को इस बात से का जिम्मेदार बताया तो किसी ने इसे जिनेवा कन्वेंशन का कारण बताया। अटकलों का बाजार गर्म ही था कि तारीख आई 2 मार्च 2019 की जब अभिनंदन वाघा बॉर्डर के जरिए भारत वापस आए। इस वापसी के बाद मौका आया देश में चुनाव का लोकतंत्र के इस पर्व में लोगों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया कई नेताओं के ऊपर बैन लगा तो कई नेताओं के जुमलों ने खूब तालियां बटोरी । 2019 में चुनाव कुल 7 चरणों में हुआ सिलसिला आगे बढ़ा फिर तारीख आई 24 मार्च 2019 जिस दिन इन चुनाव के नतीजे आए और इन नतीजों में मोदी सरकार पहले से भी अधिक सीटों के साथ सत्ता में वापस लौटी। जहां 2014 के नतीजे आने के बाद मोदी को जीत का नायक माना जा रहा था तो वहीं 2019 में मोदी के साथ अमित शाह को भी जीत का हीरो बताया गया एक तस्वीर आई उसी शाम बीजेपी मुख्यालय से जिसमें नरेंद्र मोदी और अमित शाह गुलाबों की पंखुड़ियों के बीच कमल की जीत की खुशी मना रहे थे इस जीत के बाद किसी ने इतिहास गिनाया तो किसी ने विश्व के सबसे ताकतवर नेता मोदी को बताया तो किसी ने रणनीतिकार की उपाधि अमित शाह को दी।
इस जीत के बाद कांग्रेस काफी सहम गई नतीजा हुआ कि कांग्रेस के अध्यक्ष ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया और सोनिया गांधी एक बार फिर कांग्रेस की कार्यकारिणी अध्यक्ष बन गई। कई पार्टी के नेताओं ने अपनी पार्टी के प्रवक्ताओं को टीवी चैनल पर होने वाली डिबेट में जाने से मना कर दिया।
कारवां चलता गया वह दिन भी आया जब मोदी ने देश में एक बार फिर प्रधानमंत्री पद की शपथ ली मोदी प्रधानमंत्री बने अमित शाह गृह मंत्री कैबिनेट का गठन हुआ और देश एक बार फिर मोदी के नेतृत्व में शिखर पर चढ़ने के लिए आगे बढ़ा। सरकार बनने के बाद सबसे पहले देश में ट्रिपल तलाक कानून आया। इसके बाद धारा 370 में बदलाव और फिर सिटीजन अमेंडमेंट एक्ट संसद के पटल से पास हुआ।
शुरुआत आधा साल बीतने से करते हैं तारीख की 25 जुलाई 2019 जब ट्रिपल तलाक बिल विपक्ष की कई आपत्तियों के बाद संसद से पास हुआ।अभी घाव तीन तलाक का भर ही रहा था कि इसी बीच कश्मीर में सरगर्मी बढ़ने लगी तीन तलाक से नेताओं का ध्यान हट कर कश्मीर की ओर गया कश्मीर में सुरक्षा कड़ी कर दी गई अमरनाथ की यात्रा रोक दी गई और नेताओं को नजरबंद कर दिया गया इसी बीच एक जुमला भी तैहरा कि कश्मीर में कुछ बड़ा होने वाला है लेकिन क्या इसकी किसी को भनक नहीं थी अफवाहों का बाजार गर्म था इसी बीच सारी अफवाहों और जुमलों पर विराम चिन्ह लगा जब अमित शाह ने राज्यसभा में धारा 370 में बदलाव और जम्मू कश्मीर के पुनर्गठन का बिल पेश किया संसद में खासा विरोध हुआ पूरे वाक्य का नतीजा यह हुआ कि जम्मू-कश्मीर राज्य नहीं रहा। इसकी जगह 2 केंद्र शासित राज्य हो गए पहला जम्मू कश्मीर दूसरा लद्दाख पूरी घाटी में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई हफ्तों तक फोन पर भी पाबंदी लगा दी गई स्कूल-कॉलेज बंद रहे नेताओं को भी कश्मीर जाने से रोका गया अखबार छपने बंद हो गए पोस्टपेड को छोड़कर इंटरनेट सेवा अभी भी बंद है पर खबर आ रही है कि नए साल पर सारी पाबंदियों को हटा दिया जाएगा इस उम्मीद के साथ कि जल्द ही सब कुछ ठीक हो जाएगा। सरकार अच्छे काम कर रही थी विपक्ष विरोध कर रहा था लेकिन विरोध का मुद्दा कोई मजबूत नहीं था जो कि सरकार
सरकार के खिलाफ एक मजबूत मुद्दा बन सके।तभी देश को आर्थिक मंदी के रूप में एक चोट लगी महंगाई बढ़ी सरकार के ऊपर ठीक से अर्थव्यवस्था पर काम ना करने की बातें कही गई लेकिन सरकार ने आश्वासन दिलाया कि बदलते वक्त के साथ सब कुछ ठीक हो जाएगा। सफर आगे बढ़ा महीना अक्टूबर का जब वर्षों से चले आ रहे राम मंदिर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आया फैसला आने से पहले उत्तर प्रदेश में भी सुरक्षा कड़ी कर दी गई ताकि को हिंसा ना हो और हुआ भी कुछ ऐसा ही फैसला आया तो लोगों ने उसका स्वागत किया एक दूसरे को मिठाइयां खिलाई गई और दोनों पक्षों की तरफ से फैसले को स्वीकार ने और शांति बनाए रखने की अपील की गई। सरकार के पास एक मुद्दा बढ़ गया सरकार ने इसे राज्य में होने वाले चुनाव में भी भुनाने की कोशिश की लेकिन सरकार की यह कोशिश नाकाम रहे इसका नतीजा यह हुआ कि बीजेपी को हरियाणा और महाराष्ट्र में मन मुताबिक सीटें नहीं मिल पाई हालांकि हरियाणा में जैसे तैसे सरकार बन गई

लेकिन महाराष्ट्र की सत्ता बीजेपी के यहां से चली गई सिर्फ महाराष्ट्र की सत्ता ही बीजेपी के हाथ से नहीं गए शिवसेना का हाथ भी बीजेपी के हाथ से छूट गया। महाराष्ट्र में 1 महीने के सियासी संकट के सरकार बनी बीजेपी ने भी हरसंभव कोशिश की लेकिन सरकार का हर पैंतरा फैल दिखाई दिया।पर फिर कुछ ऐसा हुआ जिसने इंसानियत को ही शर्मसार कर रख दिया देश में हैवानियत कैसे वाक्य हुए जिसने मानवता को भी शर्मसार करके रख दिया सरकार को घेरा गया सरकार भी शांत रही शायद उनके पास कोई जवाब नहीं था इसी साल उम्मीद थी कि निर्भया के आरोपियों को भी फांसी हो जाएगी लेकिन वह नहीं हो सकती पर कुलदीप सिंह सेंगर के ऊपर जरूर कार्यवाही हुई और अदालत ने उन्हें उनके आरोपों की सजा सुनाई।वक्त अपनी रफ्तार से चलता रहा और धीमे-धीमे वक्त आया संसद के मानसून सत्र का तब संसद से एक और कानून बना सीएए सिटीजन अमेंडमेंट एक्ट लेकिन इस पर सरकार धारा 370 और राम मंदिर मस्जिद विवाद की तरह विरोध और हिंसा को नहीं रोक पाई देश में काफी विरोध हुआ आगजनी की तस्वीरें इस दरमियान टीवी चैनलों पर छाई रही।लेकिन साल के बीते बीते यह विरोध भी शांत हुआ और हालात भी सामान्य हुए आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई हो रही है और नुकसान की भरपाई कई सियासत दानों के नाम भी इस हिंसा में आए उम्मीद है कुछ और नए अपडेट नए साल में इस नए कानून के ऊपर जरूर आएंगे । साल की आखरी और शुरुआती महीनों में कुछ ऐसा हुआ जो नहीं होना चाहिए था इसके साथ-साथ हमें कुछ ऐसे नेताओं को भी खोया जिन्होंने हमारे देश को सशक्त बनाने में अहम भूमिका निभाई थी कई नाम है अरुण जेटली ,सुषमा स्वराज ,शीला दीक्षित इत्यादि ।लेकिन जो हुआ सो हुआ अब मौका है एक बार फिर पुरानी बातों को भूलकर आगे बढ़ने का। इस उम्मीद के साथ कि आने वाला साल हमारे देश को एक नई उपलब्धियों और एक नए शिखर पर ले जाएगा ।

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