ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

कहानी करतारपुर साहिब की!!!!

करतारपुर कॉरिडोर वह कॉरिडोर जिसने इस गुरु पर्व परभारत के लाखों सिखों के गुरु नानक देव जी कोरिडोर स्थित गुरु घर जाने की इजाजत दी थी। पर क्या आप जानते हैं जब मक्का की तरफ पैर करके गुरु नानक देव जी सोए थे तो क्या हुआ था
गुरु नानक देव जी की मक्का यात्रा का वृतांत बहुत सारे धार्मिक ग्रथों और ऐतिहासिक पुस्तकों में भी पाया जाता है। गुरु नानक देव जी के दो प्रिय शिष्य थे। जिनमें एक हिंदू थे जिनका नाम बाला था और दूसरे मरदाना थे जो मुस्लिम धर्म से संबंध रखते थे। एक दिन मरदाना ने गुरु जी के आगे मक्का जाने की इच्छा व्यक्त करी। उन्होंने कहा, “जो मुसलमान मक्का नहीं जाता, वह सच्चा मुसलमान नहीं कहलाता।”
गुरु जी उन्हें साथ लेकर मक्का यात्रा के लिए निकल पड़े। मक्का तक पहुंचते-पंहुचते वह बहुत थक गए थे। हाजियों के लिए वहां आरामगाह बना हुआ था। वह मक्का की ओर अपने पैर करके लेट गए। जियोन नाम का शख्स, जो हाजियों की सेवा में लगा था। जब उसने गुरू जी को मक्का की तरफ पैर करके लेटा देखा तो गुस्से से आग बबुला हो गया। गुरु जी से बोला,” मक्का मदीना की तरफ पैर करके क्यों लेटे हो?”
गुरु नानक ने कहा, “वह बहुत थक गए हैं इसलिए थोड़ा आराम करना चाहते हैं। यदि तुम्हें अच्छा नहीं लग रहा है तो उनके पैर उधर कर दे, जिधर खुदा न हो।”
जियोन उनके पैर जिस भी दिशा में करता, मक्का उसी दिशा में दिखाई देने लगता। गुरू जी ने जियोन को समझाया हर दिशा में खुदा विद्यमान है। सच्चा सादक वही है जो अच्छे काम करता हुआ, खुदा को हमेशा याद रखता है।
‘‘ज्ञान गोष्ठ चर्चा सदा अनहद शब्द उठै धुनिकारा॥
सोदर आरती गावीअै अमृत वेलै जाप उचारा॥’’
गुरु जी स्वयं खेतीबाड़ी का काम करने लगे तथा दूर-दूर से लोग गुरु जी के पास धर्म कल्याण के लिए आने लगे। यहां पर भाई लहणा जी गुरु जी के दर्शनों के लिए आए तथा सदैव के लिए गुरु जी के ही होकर रह गए। गुरु जी ने उनकी कई कठिन परीक्षाएं लीं तथा हर तरह से योग्य मानकर उन्हें गुरु गद्दी दे दी तथा उनका नाम गुरु अंगद देव जी रखा। 1539 ई. में आप करतारपुर साहिब में ज्योति जोत समा गए।

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