ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

भारत की वह अनोखी उड़नपरी जिसने केडी जाधव के कांस्य पदक को सोने में बदल दिया है

भारत की वह अनोखी उड़नपरी जिसने केडी जाधव के कांस्य पदक को सोने में बदल दिया है

The unique athlete of India who has turned KD Jadhav’s bronze medal into gold.

“Everyone Salutes to the rising Sun”
उगते हुए सूरज को सभी सलाम करते हैं।

बात तो बिल्कुल जायज है,हो भी क्यों ना? सूरज की तपन से लड़कर कदम-ताल करते हुए शिखर पर जो झंडे गाड़े जाते हैं। वह हर मैदान फतह कर सकते हैं,
और जब आंखों के सामने तिरंगा लहरा रहा हो, तो सफर में रोमांच और दोगुना हो जाता है।
अप्रैल 2018  स्थान गोल्ड कोस्ट ऑस्ट्रेलिया, भारत की 4 लड़कियां,चार अलग-अलग शहरों से,  जो कि 4×400 m  रिले रेस में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही थी,
Hima Das, M.R.Poovamma,Soniya Baishya और Sarita Gayakwad.

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चारों अंतिम सांस तक दौड़ी, पर भारत के लिए मेडल   का सपना पूरा ना हो सका।
कुछ दिन पहले तक हम सब इन नामों से अनजान थे। लेकिन जो वजह मिली है हमें, इनसे रूबरू होने की
वो वजह जानकर हमारा सिर गर्व से और भी ऊंचा हो जाएगा, उन चारों में से एक नाम जो आजकल सबकी जुबां पर है-Hima Das  जो आज किसी परिचय की मोहताज नहीं है,Hima Das ट्रैक इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने वाली  पहली भारतीय बन गई हैं।
IAAF World Under-20 Athletics Championships में स्वर्ण पदक जीत कर भारत की 18 साल की इस बिटिया ने इतिहास रच दिया है।
मेडल सेरेमनी में जब राष्ट्रगान बजा  तब हम सब भारतीयों का सर फक्र से ऊंचा हो गया।
Hima Das  की आंखों में आंसू  खुद-ब-खुद पूरी दास्तां बयां कर रहे थे,  यह खुशी के आंसू थे जो अपने पूरे प्रवाह में बह रहे थे, सामने तिरंगा झंडा और  मेडल पहनाने वाले भी भारतीय,ऐसा मनोरम दृश्य  पूरे भारत को एक सूत्र में बांधने का काम कर रहा था। हो भी क्यों ना, जगह भी तो खास थी,

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Helsinki Capital Of Finland (Source Google Images)

Finland की इसी धरती पर 66 साल पहले एक भारतीय ने अपने देश का परचम लहराया था, इसी Finland की धरती पर 1952 में Pocket Dynamo  के नाम से मशहूर भारत के Khashaba Das Jadhav  ने 1952 Helsinki Olympic में  भारत को कांस्य पदक दिलाया था।

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KD Jadav (Sources Google Images)

केडी जाधव से जो कसर बाकी रह गई थी वह कसर आज इस भारत की उड़नपरी ने  स्वर्ण पदक जीतकर  पूरी कर दी। Hima Das ने  Finland की धरती से पूरे भारत को एक अनोखी सौगात भेजी है -Gold Medal
वहां से 6500 किलोमीटर दूर Assam  के Nagaon जिले के Dhing कस्बे के कंधुलिमारी(Kandhulimari)गाँव  कि पैरों की आहट ने  पूरे खेल जगत को  अपनी रफ्तार से दीवाना बना दिया है। बाबा  रंजीत  और मां जोनाली  अपने बेटीे की इस कामयाबी पर  फूले नहीं समा रहे हैं।
हिमा जब छोटी थी तब स्कूल में बच्चों के साथ फुटबॉल खेला करती थी।
उनके पहले कोच Shamsul Hoque  के कहने पर Hima  ने Athletics  की तरफ रुख कर लिया।
अब क्या था, वह दिन- दूनी रात चौगुनी मेहनत करने लगी, Hima  कि इस मेहनत के पीछे एक और नाम  जुड़ा था, Nipon Das  वह Nipon Das ही थे जिन्होंने Hima के पैरों में जान फूंक दी,

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Hima Das (Source: Google Images)

और Hima का प्रदर्शन समय दर समय और निखरता गया,
Hima कि इस सफलता  पर पूरे भारत को उन पर फक्र है।
Hima आज युवाओं के प्रेरणा स्रोत बन गई है,
और युवाओं ने उन्हें एक नया Nickname दिया है, पता है क्या?
“Second Mary kom of North east India”
Hima के इस जज्बे को सलाम करते हुए Sanju  फिल्म का एक गाना  अनायास ही मन में हिलोरे मार रहा है…….

कर हर मैदान फ़तेह बंदेया
कर हर मैदान फ़तेह……….

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