ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

भारत का वह अनोखा ठग जिसने ताजमहल को 3 बार बेच दिया था

भारत का वह अनोखा ठग जिसने ताजमहल को 3 बार बेच दिया था

आज बात उन दिनों की, जब मन में सवाल घर कर जाते थे, और पीछा छोड़ने का नाम ही नहीं लेते थे,

कहते हैं ना, कि यह मन स्थिर नहीं रहता  इधर- उधर जाने -किधर बेरोकटोक  दौड़ता रहता है- यह मन।

तो बात उसी मन की गहराइयों में छुपी उन बातों की

जो नितांत वन में  एक पथिक की भातिं  हरदम कुछ नया ढूंढती रहती थी ।

गर्मियों की छुट्टी में  हम हर साल  अपने मामा के यहां जाया करते थे। कोलकाता– जो शायद किसी पहचान का मोहताज नहीं है,

20 से 24  घंटे तक का सफर, मन में उठे हरेक सवालों को  बोते,  सींचते  और काटते  समय कब उड़न- छू हो जाता था, पता ही नहीं चलता।

रास्ते में एक छोटा सा स्टेशन पड़ता था- जीरादेई

चुंकी नाम में  जीरे का जिक्र होता था, तो मैं  अक्सर अपने माता पिता से पूछ बैठता था कि मम्मी- यहां जीरा मिलता है क्या?

और मेरी मम्मी मुस्कुराते हुए बोलती थी कि नहीं,  यहाँ जीरा तो नहीं मिलता, लेकिन यह जगह किसी खास चीज के लिए जानी जाती है।

और मैं बिना रुके यह पूछ बैठता है कि वह चीज क्या है?

मम्मी का वह उत्तर आज भी याद है-  जीरादेई भारत के पहले राष्ट्रपति  महामहिम श्री राजेंद्र प्रसाद  का जन्म स्थान है।

खैर  समय बीता और जब भी मैं  बिहार  के उस छोटे से रेलवे स्टेशन से गुजरता तो मम्मी की वह बताई गई बात  मन में आज भी मिश्री घोल देती है।

जीरादेई  बिहार राज्य में स्थित सिवान जिले का एक छोटा सा गांव  जो अपने नाम से ही कईयों को अपनी तरफ आकर्षित कर लेता है,

Greatest-Con-Man-of-India-Natwarlal

 जीरादेई ने भारत को 2 सबसे चर्चित चेहरे दिए

1- अपने महामहीम राजेंद्र बाबू  और दूसरा पता है कौन?

राजेंद्र बाबू ने अपनी काबिलियत और अपनी अच्छाई से  जो स्थान प्राप्त किया

उसकी विपरीत

जीरादेई का  वह चर्चित ,चेहरा  जिसने बॉलीवुड को भी मजबूर कर दिया,  कि वह उसे मशहूर कर दे।

बॉलीवुड  मैं भी इस व्यक्ति के नाम पर  2-3 पिक्चरें बन चुकी हैं।

जी हां, उस व्यक्ति का नाम था मिथिलेश कुमार श्रीवास्तव। पर आपने  शायद इनका नाम  कभी सुना ही नहीं। इस नाम के अतिरिक्त  वह जिस नाम से जाने जाते थे   वह नाम था

मिस्टर नटवरलाल-Mr.Natwarlal-The Greatest Thug of India

पेशे से वकील  मिथिलेश  यानी Natwarlal  के कारनामें ऐसे थे  कि कारनामे सुनकर लोगों के पैरों तले जमीन खिसक जाती थी।

नटवरलाल  ने अपने जीवन की पहली ठगी ₹1000 की की थी।  जब उन्होंने किसी दूसरे व्यक्ति की signature अपने हाथों से कर कर के पैसे  निकाल लिए थे।

ठगी में महारत हासिल करने वाले यह Natwarlal यहीं नहीं रुके उन्होंने  राजेंद्र प्रसाद से लेकर धीरूभाई अंबानी तक के signature अपने हाथों से कर के

लाखों करोड़ों रुपए अपने नाम कर लिए थे।

बोलने की ताकीद ऐसी कि किसी को भी अपनी बातों से मोहित कर दें।

कहते हैं कि उन्होंने ताजमहल को तीन बार, बेच दिया था, भारत का  राष्ट्रपति भवन भी इन से अछूता नहीं रहा और उसको भी बेच दिया था। उनका बेचने का सिलसिला यहीं नहीं रुका, एक बार तो उन्होंने पूरे संसद भवन को पूरे सांसदों के साथ बेच दिया था।

आजकल राजनीति में नेता प्रतिपक्ष एक दूसरे को यह कहकर  सम्बोधित  करते हैं कि- सब बिके हुए हैं,

Natwarlal  ने अपनी ठगी से  उपरोक्त बातों को भी चरितार्थ कर दिया था।

सच में ही यहां सब बिके हैं।

Natwarlal

 

8 राज्यों की पुलिस और लगभग 100 Cases जिनमें उन को 113 साल की सजा हो चुकी थी, यह सजा भी उन्होंने केवल 20 साल में ही निपटा दी,  जेल कोई भी हो, वे वहाँ से चंपत हो जाते थे।

एक बार तो उन्होंने भारत सरकार को ऑफर भी दिया था-  कि वह अपने तरीके से भारत के सभी कर्ज को भी  खत्म कर सकते है।

इस प्रकार उन्होंने अपनी पूरी जिंदगी संसय  में गुजारी

और इधर उधर भागते रहे।

इनकी मौत भी एक रहस्य बन कर रह गई,  एक सरकारी वकील के  कथानुसार सन 2009 में 100 से भी ज्यादा लंबित मामले  उनके खिलाफ दर्ज थे।

जबकि इसके विपरीत,  उनके भाई  की कथानुसार उनकी मृत्यु सन 1996 में ही हो गई थी। सबकी नजरों में भले ही नटवरलाल  एक ठग हो लेकिन उनके गांव वाले आज भी उन पर गर्व करते हैं।

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