ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

2014 में निकली गाड़ी 2018 में पहुंची हल्ले- हल्ले

2014 में निकली गाड़ी 2018 में पहुंची हल्लेहल्ले

जयपुर से निकली गाड़ी दिल्ली चले हल्ले हल्ले

indian-railway gyanchuski90 के दशक में यह गाना बहुत प्रचलित हुआ था।
फिल्म Gurudev का यह गाना जो कि ऋषि कपूर और श्री देवी के बीच फिल्माया गया था, आज अचानक याद आ गया, लेकिन इसकी खास वजह है।

ताजा वाकया Indian Railway का है, जी हां वही Indian Railway जो एकतरफ वर्तमान समय में बुलेट ट्रेन(Bullet Train) चलवाने जा रही है, वहीं दूसरी तरफ वह अपनी लेट-लतीफी के कारण चर्चाओं में भी है,
हो भी क्यों ना, किस्सा ही कुछ ऐसा है,

क्या है वह घटना?

एक माल गाड़ी जो सन 2014 में निकलती है अपने गंतव्य के लिए और 2018 में अपनी मंज़िल का दीदार करती है, यानी 3.5 साल लग गए उसे अपनी मंज़िल तक पहुंचने मेंविशाखापत्तनम जो कि Indian Railway के सबसे साफ सुथरे रेलवे स्टेशनों में नंबर 1 पोजीशन पर है, उसी विशाखापत्तनम रेलवे स्टेशन से उत्तर प्रदेश रूट की माल-गाड़ी में, एक Indian Potash Limited नामक कंपनी ने उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के लिए किसी ऑर्डर पर Fertilizer यानी खाद भेजी,  

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Bullet Train Source: Google images

इस कंसाइनमेंट को 1400 किलोमीटर की दूरी तय करके अपने गंतव्य तक पहुँचना था, लेकिन आर्डर समय पर यानी November 2014 तक पहुंच नहीं पाया, तब उसके मालिक ने Indian Railway से संपर्क किया, इंडियन रेलवे इस आर्डर को ट्रैक करने में असफल रहा और बस दिलासे से काम चलाता रहा, और इसी तरह डब्बे इस स्टेशन से उस स्टेशन तक घूमते रहे, अब जाकर बीते गुरुवार को यह माल गाड़ी अपने गंतव्य तक खाद लेकर पहुंची है, लेकिन यह खाद पूरी तरह से खराब हो चुकी है और इसके मालिक ने ये खाद लेने से मना कर दिया है,

माल-गाड़ी के पहुंचने के बाद की कहानी
मालिक का कहना यह है कि हमारे कई बार रिमाइंडर देने के बावजूद पिछले 3.5 सालों से बस Indian Railway की तरफ से दिलासे पर दिलासे दिए जा रहे थे।
इस विषय में रेलवे के ऑफिसर का कहना है कि इस विषय पर जांच चल रही है, कभी-कभी ऐसा होता है कि किसी डिब्बे में अगर खराबी आ जाती है तो उसे ट्रेन से अलग कर दिया जाता है। खाद से भरे इस डब्बे के साथ भी यही हुआ जिसके चलते यह घटना हुई।

खैर Indian Railway जो भी कहे लेकिन ऐसी घटनाएँ हमें आईना दिखाती हैं, कि हम विकास के रथ पर सवार तो हैंलेकिन मंज़िल का पता है ही नहीं।

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