ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

आखिरकार कौन है भारत माता?

 

भारत माता की जय,अक्सर भारतवासी इस वाक्य से अपनी देशभक्ति जाहिर करते हैं ,अमेरिका से लेकर न्यूजीलैंड तक जहां भी भारतवासी रहते हैं वहां यह नारा जरूर गूंजता है,और सिर्फ भारतवासी ही नहीं अलग मूल्क के लोग भी अपना प्रेम भारत के प्रति इसी वक्य के जरिए व्यक्त करते हैं। सड़क से लेकर संसद तक भारत माता के स्वाभिमान को बचाने के लिए कसमें खाई जाती हैं, और उसी देश में एक तबका ऐसा भी है,  जो उसी भारत माता के टुकड़े टुकड़े करने की बात कहता है और दुर्भाग्य की बात यह है कि देश के कुछ जिम्मेदार नागरिक भी इसका समर्थन करते हैं ,ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिरकार भारत माता है कौन ? जिनके स्वाभिमान के लिए सड़क से लेकर संसद तक विवाद होते रहते हैं, आपको बता दें ये कोई नया प्रश्न नहीं हैं,  असल में इसका जिक्र सबसे पहले भारत भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने अपनी किताब भारत एक खोज में किया था भारत एक खोज को आधार बनाकर अपनी एक किताब लिखी पुरुषोत्तम अग्रवाल ने हु इज भारत माता और उस किताब में उन्होंने इसका सटीक वर्णन किया है उन्होंने लिखा है जवाहरलाल नेहरू अपनी रैली में संबोधन के लिए जाते थे, तब हर बार उनकी जयकारे से पहले भारत माता की जय बोली जाती थी  इस भावना को आधार बनाकर लोगों से वह पूछ लिया करते थे जिसके आप जयकारे लगा रहे हो आखिर वह है कौन? और इस प्रश्न का वह खुद ही उत्तर देते थे,वह अपने उत्तर में कहते थे कि हिंदुस्तान का एक एक इंसान है भारत माता, भारत माता की जय कहने का मतलब है कि साधारण व्यक्ति की जय हो उन्हें विदेशी शासन से ही नहीं अन्याय और शोषण से भी मुक्ति मिलनी चाहिए पर दुर्भाग्य है जिस देश को अन्याय और शोषण से मुक्त कराने की बात कहते थे जवाहरलाल नेहरू उसी देश में उन्हीं के नाम के विश्वविद्यालय में भारत तेरे टुकड़े होंगे जैसे विरोधी नारे लगते हैं।

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