ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

कौन है वह असली Padman जिसके किरदार को अक्षय कुमार ने चार चांद लगा दिए हैं ?

कौन है वह असली Padman जिसके किरदार को अक्षय कुमार ने चार चांद लगा दिए हैं?

बात कुछ दिनों पहले की है, मैं पास की एक दुकान पर गया। वहां कुछ लड़कियां भी थी, वह कुछ खरीद रही थी दुकान से, दुकान वाले भैया ने उस चीज को एक पेपर में Wrap करके उन्हें दे दिया वह भी खुशी-खुशी चली गई। मेरे मन मैं कौतूहल सा हुआ कि वह चीज थी क्या?
 फिर पता चला की वह चीज Sanitary pads है। जिसे महिलाएं अपने Periods के दौरान use करती है।
पेपर में wrap करने का माजरा मेरे दिमाग से बाहर था। लेकिन मैं करता क्या?
भारत में शिक्षा का स्तर भले ही इतना बढ़ गया हो लेकिन आज भी इन सब चीजों पर बात करना वर्जित है। भारत के हर शहरों की यह रोज की दास्तान है, महिलाएं जिस झिझक के साथ उस चीज को खरीदती हैं उसी झिझक के साथ दुकानदार भी पेपर में wrap कर कर वह चीज उनको दे देते हैं।
शायद यह सब हमारी सोच का ही नतीजा है,

Pad-Man-Real-Story
 खैर यह यह दिनचर्या तो भारत के Middle class Family की है,
 लेकिन sanitary pads को अब भी गरीबी के तराजू से तौलना बाकी है, जिन परिवारों में खाने के लाले हो, वह sanitary pad का यूज कैसे करें?
 भारत में बहुत सी Multinational companies इनका उत्पादन करती तो है लेकिन यह आम आदमी के पहुंच से बाहर होती हैं।
 आजकल इन sanitary pads का नाम हर लोगों की जुबान पर है, हो भी क्यों ना? कहते हैं ना कि फिल्में समाज का आईना होती है। एक नई मूवी रिलीज होने वाली है- Padman, जिसकी वजह से sanitary pads का नाम सबकी जुबान पर है,
मशहूर अभिनेता अक्षय कुमार जो कि इस फिल्म में पैडमैन का किरदार निभा रहे हैं, लेकिन वह तो Reel लाइफ के Padman है, Real life के Padman तो कोई और ही है।
 नाम है, Arunachalam Muruganantham जिन्होंने सस्ते Sanitary pads बनाने की मशीन का आविष्कार किया,
 इस मशीन को बनाने के लिए Arunachalam Muruganantham ने न जाने कितनी मुश्किलों का सामना किया, जो वाकई में हम सब के लिए प्रेरणा स्रोत है,
Arunachalam Muruganantham एक गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे, पिता बुनकर और माँ खेतों में काम करने जाया करती थी, और घर के बाकी लोग भी उनका हाथ बटाया करते थे,

Real-Pad-Man-Vs-Reel-Pad-man
Arunachalam Muruganantham के जिद की शुरुआत हुई सन 1998 से, जब एक दिन उन्होंने देखा कि उनकी पत्नी शांति, उनकी नजरों से छुपा कर कोई चीज फेंकने के लिए जा रही हैं, जब उन्होंने पत्नी से इसके बारे में पूछा- तो पत्नी ने झन्नाटेदार आवाज में बोला, कि तुमसे क्या मतलब, लेकिन भाई साहब भी कहाँ मानने वाले थे, बाद में पता चला कि पत्नी के हाथ में जो चीज थी वह अखबार का टुकड़ा था, जो इतनी खराब अवस्था में था कि उससे कोई चीज भी नहीं पोछी जा सके, इस अखबार के टुकड़े का इस्तेमाल उनकी पत्नी ने periods में इस्तेमाल करने के लिए किया था।
 पति ने झट से पूछा कि तुम Sanitary pads क्यों नहीं इस्तेमाल करती? पत्नी ने उत्तर दिया- अगर इसका इस्तेमाल करना शुरू कर दिया तो महीने का खर्च तो और बढ़ जाएगा, बात तो वाजीब थी, और यह बात अरुणाचलम मुरुगनाथम के दिमाग में घर कर गई, उन्होंने मन ही मन सस्ते Sanitary pads बनाने की कल्पना प्रारंभ कर दी। सोचना अलग बात थी और करना अलग लेकिन Arunachalam थकने वाले में से नहीं थे, 2 साल के अथक प्रयास के बाद उन्होंने इस मशीन का निर्माण भी कर लिया, लेकिन इन 2 सालों में जो उन्होंने कष्ट झेले, उन्हें बयां करना इतना आसान नहीं, सबसे पहले उन्होंने अपने घर में इसकी शुरुआत की, अपने द्वारा बनाए गए पैड को उन्होंने सबसे पहले अपनी पत्नी को इस्तेमाल करने के लिए दिया, पति ने एक दो बार इस काम में उनका साथ दिया लेकिन वह भी पीछे हट गई, फिर वह मेडिकल कॉलेज गए वहां की लड़कियों को अपने द्वारा बनाए गए सेनेटरी पैड के बारे में बताया, उन्हें फ्री में sanitary pads बांटे और बोला कि इस्तेमाल करने के बाद उसे वापस कर दें, जिससे यह पता लग सके कि यह sanitary pad कितना कारगर है, सब लड़कियां उन्हें पागल समझने लगी, यहां तक कि उनकी पत्नी ने भी उनका साथ नहीं दिया और घर छोड़कर चली गई।
 लेकिन बंदे में दम था, हार कैसे मानते, उनके पास अब एक ही चारा था कि इसका इस्तेमाल खुद ही करें, उन्होंने अपने सेनेटरी पैड्स की गुणवत्ता को परखने के लिए, यह जरूरी था कि वह इसे खुद ही इस्तेमाल कर कर देखें।

Arunachalam-Muruganantham-Wth-Bill-Gates

मेहनत रंग लाई और उन्होंने सस्ते सेनेटरी पैड्स बनाने की कंपनी की नींव रखी- नाम दिया, Jayshree Industries,
 इसके बाद उन्होंने अपनी बात आईआईटी मद्रास में रखी, और उन्हें खूब सराहना मिली, पुरस्कार भी मिले, उन्हें National innovation foundation Grass root technological innovation पुरस्कार से सम्मानित किया गया,
इसके बाद उन्हें भारत के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों में से एक, पदमश्री पुरस्कार से नवाजा गया,
 उनके द्वारा बनाई गई 1300 से ज्यादा मशीने आज भारत के 27 राज्यों तथा अन्य 7 देशों में स्थापित की गई हैं।
 उन्होंने भारत के कई प्रतिष्ठित संस्थानों जैसे IIT Mumbai, IIM Bangalore, IIM Ahmadabad तथा Howard University मैं अपने व्याख्यानों से सबका दिल जीत लिया।
अब दिन दूर नहीं जब उनकी बनाई गई सस्ती सैनिटरी पैड्स गरीब महिलाओं के लिए वरदान साबित होंगी।

 

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