ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

हिंसा की आग मे क्यूँ बार-बार झूलसता JNU?

संडे की मस्ती के बाद जब घर लौटा तो सोचा देश और दुनिया का थोड़ा सा हालचाल ले लिया जाए। अमेरिका- ईरान की दुश्मनी की थोड़ी अपडेट ले ली जाए तो इसी क्रम में टीवी को खोला न्यूज़ चैनल लगाया तो कल तक जिन न्यूज़ चैनलों में अमेरिका ईरान की बात हो रही थी उन पर आज जेएनयू का मुद्दा हावी था। छात्रों के प्रदर्शन की तस्वीर आ रही थी नारे लग रहे थेऔर पुलिस के ऊपर तंज कसे जा रहे थे पुलिस के ऊपर भी आरोप लग रहे थे। तो इन्हीं सबके बीच कुछ लोग अपनी राजनीति भी चमका रहे थे। वह अंदर जाने की बात कर रहे थे और पुलिस उन्हें मना कर रही थी खैर जैसे-जैसे रात का अंधेरा बड़ा वह भी रफूचक्कर हो गए। एकाएक हिंसा के वीडियो सामने आए जिसको देखकर यह अंदाजा लगाना थोड़ा मुश्किल था कि यहां पर विरोध प्रदर्शन हो रहा था कि हिंसा। वैसे दोनों में ज्यादा फर्क नहीं है और जो फर्क है वह इतना कि विरोध प्रदर्शन चीजों को सुलझा देता है और हिंसा चीजों को उलझा देती है। असल में आपको बताता हूं कि पूरा वाकया क्या था ?जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में कल कुछ छात्र सेमेस्टर रजिस्ट्रेशन का विरोध कर रहे थे। समर्थन कर रहे छात्रों को रोकने के लिए कुछ छात्र गुस्सा से आगे बढ़े जिससे दोनों के बीच संघर्ष हुआ. इस बीच रॉड और डंडे लिए ‘नकाबपोश बदमाशों ने छात्रावास के कमरों में तोड़ फोड़ की. उन्हें चेतावनी दी गई कि जो परिसर के शांतिपूर्ण शिक्षण के माहौल को बिगाड़ने की कोशिश करेगा उसे बख्शा नहीं जाएगा  फिर भी  कुछ नकाबपोश लोगों ने छात्रों तथा शिक्षकों पर हमला किया, परिसर में संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जिसके बाद प्रशासन को पुलिस को बुलाना पड़ा. हमले में जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आईशी घोष सहित कम से कम 28 लोग घायल हो गये जिन्हें एम्स में भर्ती कराया गया है.और फिर पूरे परिसर में पुलिस ने किसी को भी अंदर जाने की इजाजत नहीं दि।जहां कुछ छात्र जेएनयू के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे तो कुछ छात्र दिल्ली पुलिस हेड क्वार्टर के बाहर भी प्रदर्शन कर रहे थे आरोप लगा रहे थे की पुलिस की लापरवाही से हुआ है।वैसे बात तो सोचने वाली है कि जिस जेएनयू कैंपस में जाने से पहले गाड़ी का नंबर और पूरी डिटेल गेट पर नोट होती हैं ऐसे में वहां इतनी ज्यादा मात्रा में नकाबपोश छात्र लाठी, डंडे और रॉड के साथ कैसे पहुंच गए। जैसे-जैसे रात की ठंड बढ़ रही थी वैसे वैसे कुछ नामी नेताओं के टि्वटर हैंडल से गरमा गरम ट्वीट भी आ रहे थे कोई केंद्र सरकार के ऊपर निशाना साध रहा था तो कोई पुलिस प्रशासन के ऊपर उंगली उठा रहा था। इतिहास गिनाया जा रहा था कि आज तक ऐसा कभी भी नहीं हुआ।कुल मिलाकर देखा जाए तो लोग अपने-अपने तरह से राजनीतिक रोटियां सेक रहे थे। सोचकर मन विचलित हो उठता है कि आने वाले समय में जिनके हाथ में देश का भविष्य होगा उनके हाथ में आज लाठी-डंडे है तो आगे कैसे श्रेष्ठ भारत का सपना साकार हो पाएगा।

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