ज्ञान गंगा की अमोघ चुस्की

कैसे एक Leather Bag में छिपी थी Budget की गुत्थी ?

कैसे एक Leather Bag में छिपी थी Budget की गुत्थी ?

आज के Technical युग में अगर हम  कोई टेक्निकल सामान खरीदने जाते हैं। मान लीजिए हम किसी दुकान पर Computer खरीदने गए या Laptop खरीदने गए और दुकानदार से बोले कि भैया एक Laptop दिखाना।
दुकानदार का फट से उत्तर आता है कि भैया Configuration  बताइए।
ठीक उसी प्रकार अगर हम किसी  साड़ी के दुकान पर चले गए,  और बोला कि भैया एक साड़ी दिखा दो  दुकानदार की तरफ से जो पहला उत्तर आएगा  कि भैया  आपका Budget क्या है ?
तो अब जान ही लेते हैं कि यह Budget
है क्या चीज़ और इसकी उत्पत्ति  हुई कहां से है?

Budget-Trivia
तो चलिए हम आपको बताते हैं कि यह Budget शब्द आया कहां से?
बजट की उत्पत्ति France से हुई है। लेकिन जब बात France की है तो वहां तो अलग ही कुछ नाम होगा जरूर।
एकदम सही पकड़े हैं,
Budget  शब्द की उत्पत्ति  एक प्राचीन फ्रांसीसी शब्द  से हुई है जिसका नाम है-  “बुझेट”
फ्रांसीसी भाषा में “बुझेट” मतलब होता है “चमड़े का बैग”। बटवा समझ लीजिए जिसमें हम अपने पैसे रखते हैं, वह भी तो शायद चमड़े का ही होता है।
सबसे पहले ब्रिटिश प्रधानमंत्री Robert walpole ने  अपने वित्तीय प्रस्ताव को  जिस बैग से निकाला था वह बैग चमड़े का था,  तबसे Budget शब्द का प्रयोग  सरकारी लेखा -जोखा के तौर पर होने लगा।
खैर यह तो बातें थी बजट के उद्भव की,  अब उद्गम की तरफ भी बढ़ लेते हैं।

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भारत में बजट को लेकर तरह-तरह के प्रयोग हुए हैं,
एक ऐसा ही प्रयोग हुआ  सन 1965- 66 में जब तत्कालीन वित्त मंत्री ने आम बजट को खास बजट बना दिया था।
जानते हैं कैसे- Black Money  नाम तो सुना ही होगा नोटबंदी में जो सबसे चर्चित नाम था– Black Money.
Black Money को बंद करने के लिए जो ब्रह्मास्त्र नरेंद्र मोदी ने नोटबंदी के तौर पर चलाया था,

वैसा ही  तीर सन 1965-66  में तत्कालीन वित्त मंत्री
T.T Krishnamachari  ने चलाया था,  लेकिन उसमें  एक Clause लगा दिया, स्वेच्छा का।
हुआ यूं कि सन 1965- 66 के बजट  में वित्त मंत्री T.T Krishnamachari ने भारत में पहली बार  अघोषित आय(Black Money) को स्वेच्छा से घोषित करने का प्रावधान  शामिल किया।
इस फैसले ने उस समय Budget का रंग रुप ही बदल दिया था।
बजट को लेकर एक और अच्छी  और एकदम रोचक बात।

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भारत का आम बजट पहले शाम को पेश हुआ करता था, सन 1998 तक ऐसा ही चलता था बजट शाम को पेश हुआ करती थी।
इस Clause को हटाने का श्रेय जाता है, तत्कालिक  वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा जी को।
दिन था 27 फरवरी सन 1999 जब तात्कालिक वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा जी ने  बजट को शाम के बजाय सुबह 11  बचे पेश किया था।
कहते हैं ना कि Numerology और co- incidences से कोई अछूता नहीं रहता,Budget पर भी इसकी छत्रछाया पढ़ ही गई। माध्यम बने Morarji Desai.

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Morarji Desai भारत के वह एकमात्र ऐसे वित्त मंत्री हैं जिन्होंने  अपने जन्मदिन पर दो बार बजट पेश किया।

दिन क्या था पता है 29 फरवरी,  जो खुद 4 साल में एक बार आता है,
Morarji Desai जिनका जन्म 29 फरवरी सन 1896 में हुआ था, इन्होंने सन 1964 और 1968 को अपने जन्मदिन के दिन  ही बजट पेश किया था।
हमारे यहां  भारतवर्ष में अगर कुछ नया होता है तो उसकी शुरुआत भी मीठे से होती है, बजट में  इसका प्रावधान है,  पर शुक्र है इसमें कोई Clause नहीं है,
बस काम शुरू होने से पहले कुछ मीठा हो जाए
Budget  मैं भी एक ऐसी रस्म है जिसका नाम है
“Halwa ceremony”

Halwa-Ceremony-Budget
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भारत में आम बजट से जुड़े दस्तावेजों  की छपाई का  काम आधिकारिक रूप से “Halwa ceromany” की रस्म के साथ शुरू हो जाता है,
बजट से जुड़ी कागजातों की छपाई से पहले यह कार्यक्रम होता है,  इस परंपरा के मुताबिक एक बहुत बड़ी कढ़ाई में  हलवा बनाया जाता है,  इसमें वित्त मंत्री खुद सम्मिलित होते हैं और  कर्मचारियों से अधिकारियों तक सभी को  हलवा बांटते हैं।
इसके बाद बजट का पूरा काम पूरी तरह से Start हो जाता है।
बजट के उद्भव से लेकर उद्गम तक सारी दास्तां आपके सामने  है बस पढ़िए और पढ़ाइए। बजट की इन  गुपचुप बातों को प्यार से आगे बढ़ाइए।

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